शहरी क्षेत्र में रहने वाले श्रमिकों, कामगारों व गरीब छात्रों को किफायती दर पर किराए पर आवास की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदेश के सभी नगर निकाय क्षेत्रों में 45 लाख श्रमिकों व कामगारों के लिए हाउसिंग कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना है। दरअसल तमाम प्रावधानों के बावजूद शहरों में मलिन बस्तियों व अनियोजित कॉलोनियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।
इसकी वजह तलाशने के लिए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने सर्वे कराया था। इसके आधार पर केंद्र सरकार ने ‘अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्पलेक्स स्कीम’ शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत शहरी क्षेत्र में रहने वाले श्रमिकों, कामगारों तथा गरीब छात्रों को किफायती दर पर आवास उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार का मानना है कि यदि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों की आवासीय समस्या का समाधान कर दिया जाए तो मलिन बस्तियों व अनियोजित व अवैध कॉलोनियों की संख्या को नियंत्रित किया जा सकेगा। अब प्रदेश में भी इस स्कीम को लागू करने की तैयारी है। इसकी जिम्मेदारी आवास एवं शहरी नियोजन तथा नगर विकास विभाग को दी गई है।
दोनों विभागों ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने प्रस्तावित स्कीम का प्रेजेंटेशन भी दिया था। अब इसे जमीन पर उतारने की कवायद शुरू कर दी गई है। नगर निकायों व विकास प्राधिकरणों को हाउसिंग कॉम्पलेक्स बनाने के लिए जमीन की तलाश करने के निर्देश दिए गए हैं।