अमृत योजना और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए केंद्र के दिशा-निर्देश के मुताबिक प्रदेश सरकार ने ‘भवन निर्माण एवं विकास उपविधि-2008’ (बिल्डिंग बाइलॉज) के कई प्रावधानों में संशोधन किया है। इसमें मकान या ग्रुप हाउसिंग का नक्शा 30 दिन में पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।
अब तक यह अवधि 90 दिन थी। इस समय सीमा के भीतर यदि विकास प्राधिकरणों ने नक्शे का निस्तारण नहीं किया तो नक्शा स्वत: पास मान लिया जाएगा। इसी तरह सभी तरह के भूखंडों पर प्रस्तावित ऐसे भवनों में जहां रोज 10 हजार लीटर पानी का डिस्चार्ज होता हो, वेस्ट वाटर रिसाइक्लिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया है।
अमृत योजना के तहत शहरी सुविधाओं में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने पहले भी एक ‘मॉडल बिल्डिंग बाइलॉज’ जारी किया है। इसी तरह ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में तैयार बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान के क्रियान्वयन से संबंधित गाइडलाइन भी जारी की गई है। इसके मद्देनजर आवास विभाग ने भवन निर्माण एवं विकास उपविधि-2008 में संशोधन किया है।
संशोधित बाइलॉज में औद्योगिक भवनों को छोड़कर व्यावसायिक और कार्यालय भवनों समेत अन्य प्रकार के भवन निर्माण के लिए दाखिल नक्शा 30 दिन के भीतर पास करना जरूरी कर दिया गया है। अलबत्ता यदि आवेदक खुद समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध करे तो इसे बढ़ाया जा सकता है। संशोधित बिल्डिंग बाइलॉज के बारे में आवास आयुक्त समेत सभी विकास प्राधिकरणों केउपाध्यक्षों को दिशा-निर्देश भेज दिया गया है।