लखनऊ। कोरोना मरीजोें से मनमानी वसूली करने वाले विभूतिखंड के मैक्वेल, गाजीपुर के देविना और जानकीपुरम के जेपी अस्पताल के प्रबंधक, निदेशक व संचालकों के खिलाफ मंगलवार को मुकदमा दर्ज कर लिया गया। प्रभारी अधिकारी डॉ. रोशन जैकब ने 12 मई को इन अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया था, जिसमें कई खामियां मिली थीं। जांच में यह भी सामने आया कि देविना अस्पताल में एक भी एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है। आरोप सही पाए जाने के बाद प्रभारी अधिकारी ने तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया था। इसके बावजूद सीएमओ कायार्लय से लापरवाही की गई। इस पर सोमवार को डॉ. रोशन ने सीएमओ को चेतावनी दी थी, जिसके बाद आनन-फानन देर रात थानों में तहरीर भेजी गई।
सीएमओ को चेतावनी दी तो हुआ केस
प्रभारी अधिकारी ने सोमवार को मुकदमा दर्ज कराने की प्रगति आख्या मांगी तो सीएमओ कार्यालय से टालमटोल किया जाने लगा। इस पर उन्होंने सीएमओ को चेतावनी पत्र जारी किया। इसके बाद तहरीर भेजी गई। हालांकि, इसमें भी सीएमओ कार्यालय से खेल किया गया। गाजीपुर थाने में आने वाले देविना अस्पताल के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए चिनहट थाने में तहरीर भेज दी गई। वहां से वापस आने के बाद दोबारा चिनहट के सामने गाजीपुर थाना दर्ज कर तहरीर भेजी गई, जिस पर केस दर्ज हुआ। प्रभारी निरीक्षक गाजीपुर प्रशांत मिश्रा के मुताबिक देविना अस्पताल के खिलाफ जालसाजी, कोविड प्रोटोकॉल के उल्लंघन, महामारी अधिनियम सहित कई संगीन धाराओं में केस दर्ज किया गया। वहीं, एसीपी विभूतिखंड प्रवीण मलिक के मुताबिक मैक्वेल अस्पताल के खिलाफ केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
अस्पतालों में मिली थीं ये खामियां
जेपी अस्पताल : कोविड मरीजों से अधिक वसूली, टेस्ट के अलावा कोविड के इलाज के लिए दवाइयों, पीपीई किट, ऑक्सीजन, बेड, भोजन, डॉक्टर कंसलटेंसी, नर्सिंग चार्ज के रुपये जमा कराए गए। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन, मैनेजमेंट, प्रोफेशनल चार्ज के मद में भी भुगतान कराया गया। ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता के बाद भी मरीजों से इसके नाम पर वसूली की गई।
मैक्वेल अस्पताल : समरी दवा बिल, बीएचटी, व्यवस्थित तरीके से नहीं दर्शाया गया था। कोविड मरीजों से अधिक वसूली की गई थी। डॉक्टर का कंसलटेंसी व प्रॉसीजनल चार्ज अलग से लिया गया था।
देविना अस्पताल : नर्सिंग चार्ज, डॉक्टर विजिट शुल्क, ऑक्सीजन का अतिरिक्त चार्ज वसूला गया। जांच में पाया गया कि इस अस्पताल में कोई भी एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है।
हर्षा, हिंद हॉस्पिटल पर भी केस दर्ज करने की रिपोर्ट
कोविड मरीजों से अवैध वसूली करने वाले दो अन्य अस्पतालों हर्षा, हिंद के खिलाफ भी शिकायत मिली है। पीड़ितों ने आरोप लगाया था कि ऑक्सीजन होने के बावजूद उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई। तीन घंटे तक गंभीर हालत में वेटिंग एरिया में रोके रखा गया। साथ ही निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक वसूली की गई। शिकायत मिलने पर एसीपी अलीगंज अखिलेश सिंह की ओर से कराई जांच में आरोप सही पाए गए। उन्होंने रिपोर्ट में मड़ियांव स्थित हर्षा हॉस्पिटल व हिंद हॉस्पिटल व ट्रॉमा सेंटर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की है। एसीपी के मुताबिक उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद केस दर्ज किया जाएगा।
ओपी चौधरी, चरक व मेट्रो सिटी हॉस्पिटल से मांगा स्पष्टीकरण
कोविड मरीजों से अधिक वसूली की शिकायत पर प्रभारी अधिकारी डॉ. रोशन जैकब ने मंगलवार को ओपी चौधरी, चरक व मेट्रो सिटी हॉस्पिटल से 24 घंटे में स्पष्टीकरण मांगा है। प्रभारी अधिकारी ने बताया कि नोडल अधिकारी और डॉक्टरों, मजिस्ट्रेट की टीमें निरीक्षण व जांच कर रही हैं। दोषी पाए जाने वाले अस्पतालों पर एफआईआर करवाई जाएगी।
शिकायत में कहा गया कि ओपी चौधरी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में दवाओं के मद में मनमाना शुल्क लिया जा रहा है। सर्जिकल गुड्स, चिकित्सा परामर्श, पैथोलॉजी जांच व अन्य मदों में भी अधिक राशि वसूली गई। प्रभारी अधिकारी ने अस्पताल को 24 घंटे में सभी संबंधित दस्तावेज सहित जवाब देने को कहा है।
दस लाख से अधिक का बना दिया बिल
कोविड मरीज के परिवारीजन की शिकायत अनुसार रोगी को 21 अप्रैल को जेहटा रोड स्थित हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां वह पांच मई तक रहा। इसके बाद उसे चरक हॉस्पिटल में पोस्ट कोविड इलाज के लिए भर्ती कराया गया। इस दौरान 13 मई को मरीज की मौत हो गई। हॉस्पिटल ने भर्ती अवधि का 10 लाख रुपये से अधिक का बिल बना दिया। इसमें 2 लाख 4 हजार 65 रुपये दवाइयों के वसूले गए। प्रभारी अधिकारी के अनुसार बिल देखकर लगता है कि हॉस्पिटल ने डॉक्टर विजिट सहित कई मदों में अत्यधिक राशि वसूली है। इस अस्पताल से भी 24 घंटे में सभी दस्तावेज सहित जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।
पांच लाख से अधिक वसूलकर बिल न देने का आरोप
गोमतीनगर के मेट्रो सिटी हॉस्पिटल के खिलाफ शिकायत है कि कोविड मरीज से आठ दिन के इलाज में 5 लाख 25 हजार रुपये वसूले गए। इसके बाद भी कोई बिल नहीं दिया। डिस्चार्ज के 15 दिन बाद भी बिल नहीं दिए गए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मरीज के भोजन, डॉक्टर व स्टाफ के लिए पीपीई किट, ग्लब्स, मास्क आदि का खर्चा भी वसूला गया। शिकायतकर्ता ने हॉस्पिटल पर मानसिक प्रताड़ना व मारपीट का भी आरोप लगाया है। प्रभारी अधिकारी ने इस पर जवाब तलब किया है।