लखनऊ। भाऊराव देवरस न्यास की ओर से रविवार को माधव सभागार निरालानगर में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने छह नवोदित साहित्यकारों को मौलिक लेखन के लिए 28वें प्रताप नारायण मिश्र स्मृति सम्मान से नवाजा। यह सम्मान देश के विभिन्न राज्यों से चुने गए 40 वर्ष से कम उम्र के युवा साहित्यकारों को विभिन्न विधाओं में मौलिक लेखन के लिए दिया जाता है। इसके तहत उन्हें 25 हजार रुपये की सम्मान राशि, प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।
यह पुरस्कार सीतापुर के देवेंद्र कश्यप निडर को काव्य के क्षेत्र में, कानपुर के मृदुल कपिल को कथा साहित्य के क्षेत्र में, शाहजहांपुर की युवा कवयित्री सृष्टि पांडेय को बाल साहित्य के क्षेत्र में, बठिंडा पंजाब के अमित सिंह कुशवाहा को पत्रकारिता के क्षेत्र में, बिहार के संजय चौबे को संस्कृत भाषा में लेखन के लिए और बंगलूरू कर्नाटक के सुनील केएस को कन्नड़ भाषा साहित्य के लिए सम्मानित किया गया।
सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक रहे तो वहीं अध्यक्षता बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय राजस्थान के कुलपति अम्बरीश विद्यार्थी ने की।
इस दौरान उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पं. प्रताप नारायण मिश्र को याद करते हुए कहा कि आज के युवाओं को उन्हीं की तरह राष्ट्र के लिए सर्वस्व अर्पण करने को तत्पर रहने का भाव अपने लेखन में भरना होगा। उप मुख्यमंत्री ने भाऊराव देवरस न्यास के सामाजिक सरोकारों को सराहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विजय कर्ण ने किया। इस दौरान सेठ एमआर जयपुरिया विद्यालय के बच्चों ने ऑर्केस्ट्रा पर भक्तिमय संगीत की प्रस्तुति दी।
इनसेट-
दशरथ मांझी पर लिखा प्रबंध काव्य
सीतापुर के सिधौली तहसील के अलीपुर गांव निवासी देवेंद्र कश्यप निडर पेशे से बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक हैं। उन्हें माउंटेनमैन ऑफ इंडिया के नाम से मशहूर दशरथ मांझी के जीवन संघर्षों पर केंद्रित प्रबंध काव्य श्रमवीर रचना के लिए सम्मानित किया गया।
बॉक्स- पिता की प्रेरणा से मिला प्रोत्साहन
शाहजहांपुर की सृष्टि पांडेय काशी हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी विषय से परास्नातक कर रही हैं। उन्हें इससे पहले भोपाल में बाल साहित्य सम्मान व बीएचयू में काव्य लेखन पुरस्कार आदि से सम्मानित किया जा चुका है। साहित्य अकादमी नई दिल्ली से प्रकाशित प्रतिनिधि बाल कविता संचयन समेत अन्य संकलनों में सृष्टि की बाल कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं। सृष्टि बताती हैं कि उन्होंने पहली कविता 10 वर्ष की उम्र में लिखी। पिता डॉ. नागेश पांडेय संजय ख्यातिलब्ध साहित्यकार हैं। पिता की प्रेरणा और प्रोत्साहन से उनके लेखन को पंख लगे। कार्यक्रम के दौरान सृष्टि ने बाल कविता सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
बॉक्स- कानपुर के मृदुल ने लिखी वेब सीरीज
कानपुर के मृदुल कपिल वर्ष 2015 से लेखन कार्य कर रहे हैं। इनके तीन कहानी संग्रह चीनी कितने चम्मच, कानपुर की घातक कथाएं और मोहब्बत 24 कैरेट प्रकशित हो चुकी हैं। मृदुल की कहानियों पर रंगमंच पर अनेकों बार मंचन हो चुके हैं। जल्द ही मृदुल की लिखी वेब सीरीज हनक जो गैंगस्टर विकास दुबे के जीवन पर पर आधारित है, रिलीज होने वाली है। मृदुल को कहानी संग्रह मोहब्बत 24 कैरट के लिए सम्मानित किया गया।