आयुष मंत्रालय ने होम्योपैथिक चिकित्सकों को कोविड-19 के मरीजों के उपचार की अनुमति दे दी है। गोरखपुर स्थित होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज को कोविड हॉस्पिटल बना दिया गया है। इस बीच कुछ संगठन विरोध भी शुरू कर दिए हैं।
आयुष मंत्रालय ने होम्योपैथिक चिकित्सकों को लक्षणविहीन और शुरुआती लक्षण वाले मरीजों को देखने के लिए कहा है। जो मरीज होम आईसोलेशन में रहकर इलाज कर रहे हैं, उन्हें भी होम्योपैथिक चिकित्सक देख सकते हैं। इन मरीजों को आरसेनिकम एलबम 30 सी की चार गोली दिन में दो बार सात दिन तक देना होगा। इसी प्रकार हल्के लक्षण वाले मरीजों को एकोनिटम नेपोलस, आरसेनिकम एलबम, बेलाडोना, बरयोनिया एलबा, इयूपाटोरियम परफोलियटम, फेरम फास्फोरिकम, गलसेमियम, फास्फोरस, रस टाक्सिकोडेंड्रम दवाएं चलेंगी। दवा की खुराक डाक्टर मरीज की हालत को देखकर तय करेगा।
इस गाइडलाइन के जारी होने के बाद गोरखपुर के राजा हरी प्रसाद मल्ल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल बड़हलगंज को कोविड अस्पताल बनाया जा रहा है। इसी तरह अन्य मेडिकल कालेजों को भी कोविड मरीजों का उपचार शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
एक तरफ तैयारी तो दूसरी तरफ विरोध भी
राजा हरी प्रसाद मल्ल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल बनाने को लेकर विरोध भी शुरू हो गया। विरोध करने वालों का तर्क है कि कॉलेज के 13 अध्यापको में से केवल 3 नियमित है और 10 संविदा पर है | उन 10 संविदा शिक्षकों की पारिवारिक व सामाजिक सुरक्षा का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। उनकी मांग है कि सरकार संविदा शिक्षकों की कोरोनावायरस से मृत्यु होने की स्थिति में आश्रितों व परिवार का भरण पोषण की घोषणा करें।