राजकीय होम्योपैथी नेशनल मेडिकल कॉलेज।
लखनऊ। इलाज की होम्योपैथी विधा त्वचा रोगियों का भरोसा जीतने में सफलता पा रही है। राजकीय होम्योपैथी नेशनल मेडिकल कॉलेज में आने वाले कुल मरीजों में करीब एक चौथाई त्वचा रोग के हैं।
कॉलेज के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. पन्नालाल के अनुसार, होम्योपैथी की दवाएं कई रोगों पर बेहद कारगर हैं। जानकारी के अभाव में रोगी इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। होम्योपैथी का इलाज थोड़ा लंबा है, लेकिन नियमित रूप से करने पर रोग स्थायी रूप से ठीक हो जाता है। इस समय ओपीडी में एक्जिमा (दाद-खाज), सोरायसिस (छाल रोग), सफेद दाग (विटिलिगो) और फंगल संक्रमण के रोगी आते हैं। सफेद दाग के रोगियों को करीब छह महीने में, जबकि छाल रोगियों का इलाज लंबा चलता है। कोर्स पूरा करने पर रोग पूरी तरह से ठीक हो जाता है। इसका इलाज खर्च पांच सौ रुपये भी नहीं पहुंचता।
खुद न बनें अपने डॉक्टर
कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डीके सोनकर के अनुसार, होम्योपैथी की दवाएं सर्वसुलभ हैं और आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन विशेषज्ञ के परामर्श के आधार पर ही इन्हें लेना चाहिए। जरूरी नहीं है कि एक ही रोग के दो रोगियों को वही दवा असर करे। संभव है कि रोगी अलग होने पर उनकी दवाएं भी अलग हों, क्योंकि ये दवाएं लक्षण के आधार पर दी जाती हैं।
खून की जांच का संकट
संस्थान में खून की सभी जांच उपलब्ध नहीं है। खून की सामान्य जांच तो हो जाती है, लेकिन त्वचा रोगों की जांच के लिए मरीजों को निजी केंद्र जाना होता है। इससे उनके इलाज की लागत बढ़ जाती है।