लखनऊ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का कहना है कि एक समय था कि पहले यूपी की इन्वेस्टर्स समिट भी दिल्ली में करने सरकार जाती थी। निवेशक लखनऊ आना ही नहीं चाहते थे। अगर निवेशक नहीं आना चाहता था, तो निवेश कैसे आता। अब लखनऊ में इन्वेस्टर समिट होती है। बड़ी संख्या में निवेशक और निवेश आए हैं। यह यूपी के साथ भारत के विकास को मदद मिलेगी। ऐसा योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सरकार के पांच बिंदुओं पर काम करने की वजह से हुआ।
सहकारिता में काफी काम यूपी में करने की जरूरत
दधीचि हैंगर में एमएसएमई और सहकारिता पर आयोजित सत्र में गृहमंत्री शाह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विज़न और साहस के साथ इस सफल आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा, ये तीन दिन अगले तीन साल के लिए फलदायी साबित होंगे। किसी राज्य में निवेश लाना है तो कानून व्यवस्था, संसाधन, बेहतर नीतियां, पारदर्शिता से काम, त्वरित निर्णय राज्य का मंत्रिमंडल ले, ये सभी राज्य के विकास के लिए जरूरी है। बीजेपी सरकार ने ऐसा करके दिखाया है।
कानून व्यवस्था, पारदर्शिता, त्वरित निर्णय, बेहतर नीतियों ने बदलाव किया
यूपी में सबसे अधिक निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर में हुआ है। बेहतर नीतियां बनीं हैं। योगी सरकार पारदर्शी तरीके से त्वरित निर्णय लेते हुए काम किये हैं। सबसे पहला जलमार्ग यूपी में काशी से हल्दिया के बीच बना है। उन्होंने आगे कहा कि भौतिक विज्ञान का नियम है, ई इक्वल टू एमसी स्क्वायर। यहां यूपी में अब मास भी है और मोमेंटम भी। सबसे अधिक आबादी, सबसे ज्यादा क्षेत्रफल, सबसे अधिक संभावना। माँ गंगा, यमुना की कृपा है कि आज भी हाथ से चलने वाले नल से पानी आता है। उम्मीद है कि यूपी पीएम मोदी की फाइव ट्रिलियन इकॉनमी के लक्ष्य को पूरा कराएगा।
मुख्य सचिव अपनी एमएसएमई पॉलिसी और बेहतर बनाइए, मैं पढ़ चुका हूं...
अमित शाह बोले कि कई देश की बड़ी कंपनी को जनता हूं जिनकी शुरुआत एमएसएमई से हुई। हिम्मत दिखाई और आज इतने बड़े बने। बड़ी इंडस्ट्री बनाई। एमएसएमई ही देश के विकास का रास्ता है। ओडीओपी के माध्यम से यहां तो सीएम योगी ने गृह उद्योग की भी नीति तय कर दी है। मुख्य सचिव देखें कि बड़ी इंडस्ट्री के लिए कौन सी एंसिलरी यूनिट लग सकती है। उसे स्थानीय स्तर पर ही बाजार मिल जाएगा।
एमएसएमई पालिसी और बेहतर हो सकती है
इंडस्ट्री को भी बाहरी राज्य से सामान नहीं मंगाना पड़ेगा। रोजगार ही इको सिस्टम को ठीक बनाएगा। एमएसएमई में ही क्षमता है कि रोजगार इतना दे सके कि इको सिस्टम पूरे यूपी का बेहतर बनेगा। उन्होंने कहा, मुख्य सचिव अभी आपकी एमएसएमई पालिसी और बेहतर हो सकती है। इसे करिए। मैं आपकी पालिसी पढ़ चुका हूं। यूपी में सबसे कम सहकारिता में हुआ है। सबसे अधिक संभावना है। इसके लिए जल्दी ही यूपी में आऊंगा।
सावरकर से की अमित शाह की तुलना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गृहमंत्री में 4 स्वरूप समाहित हैं, राष्ट्रभक्ति वीर सावरकर, चाणक्य, आदि शंकराचार्य अध्यात्म बल, पीएम मोदी का नेतृत्व। उत्तर प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई यूनिट 2017 से पहले दम तोड़ रही थीं। बीजेपी ने अपने लोक कल्याण संकल्प मंत्र में गृहमंत्री अमित शाह ने इसके लिए कार्य योजना बनाने की बात लिखवाई। सरकार बनते ही प्रोत्साहित कर पुनर्जन्म कराया। आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला बनी, निर्यात दो गुना हुआ, 80 लाख करोड़ से 1.60 लाख करोड़। कोविड में वापस आये 40 लाख कामगार को उद्यमियों ने रोजगार से जोड़ा।
हर तरफ हो रहा विकास
एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने कहा कि 34 लाख करोड़ के प्रस्ताव निवेशकों के आये हैं। उत्तर प्रदेश उत्त्तम प्रदेश की तरफ बढ़ गया है। 8856 कंपनी अब तक एमओयू कर हैं। 1100 इनमें से एमएसएमई के लिए हैं। हर तरफ विकास हो रहा है। फ्लाटेड फैक्ट्री भी जमीन की कमी वाली जगहों पर बना रहे। यूपी की सुधरी कानून व्यवस्था और जीरो टॉलरेंस की नीति पर भी एक वीडियो डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई।