अंग्रेजी हुकूमत में चलने वाले ऐतिहासिक स्टीम इंजन लखनऊ के छोटे स्टेशनों की शोभा बढ़ाएंगे। चारबाग रेलवे स्टेशन की तर्ज पर इन स्टीम इंजनों को हेरिटेज प्रोजेक्ट के अंतर्गत रेलवे स्टेशनों पर लगाया जाएगा। रेल मंत्रालय के पास ऐसे स्टीम इंजनों की भरमार है जो अब आउटडेटेड हो चुके हैं और चलन से बाहर हैं।
क्योंकि स्टीम इंजनों की जगह डीजल और बिजली से चलने वाले इंजनों ने ले ली है, इसलिए इन इंजनों का कोई पुरसाहाल नहीं है। ऐसे में रेलवे बोर्ड की ओर से हेरिटेज प्रोजेक्ट बनाया गया, जिसमें इन ऐतिहासिक स्टीम इंजनों को रेलवे स्टेशनों की सुंदरता बढ़ाने में इस्तेमाल करने पर सहमति बनी।
रेलवे के इतिहास से लोगों को कराया जा रहा रूबरू
इसके बाद उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के चारबाग रेलवे स्टेशन पर ऐसे ही एक इंजन को सर्कुलेटिंग एरिया में लगाया गया, जिससे खूबसूरती में चार चांद लग गए। वहीं पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के हजरतगंज स्थित डीआरएम कार्यालय में भी स्टीम इंजन लगाया गया है। जबकि लोहिया पार्क में भी एक ऐसे ही स्टीम इंजन को लगाकर रेलवे के इतिहास से लोगों को रूबरू कराया जा रहा है।
उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के एक आला अधिकारी ने बताया कि चारबाग रेलवे स्टेशन की तर्ज पर राजधानी के दूसरे छोटे स्टेशनों पर भी स्टीम इंजन को लगाकर स्टेशन की खूबसूरती बढ़ाने की योजना तैयार की गई है। आलमबाग स्थित कैरिज एंड वैगन वर्कशॉप, लोको वर्कशॉप में ऐसे स्टीम इंजन के अतिरिक्त पुराने समय में इस्तेमाल होने वाली क्रेन, टर्न टेबल (जो मरम्मत के लिए आए स्टीम इंजनों की दिशा बदलने के काम आती थी), लकड़ी की बनी पुरानी बोगियों सहित अन्य ऐतिहासिक हिस्से रखे हुए हैं, जिनका इस योजना के तहत इस्तेमाल हो सकेगा।