डॉ. हरिदयाल शास्त्री
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ज्योतिष गुरू स्वामी डॉ. हरिदयाल शास्त्री का कहना है कि धर्मस्थलों से लाउडस्पीकर हटाने का निर्णय उचित है। पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन तक तो ठीक है लेकिन कुछ धर्मस्थलों पर लंबे समय तक लाउडस्पीकर बजते रहते हैं जिससे लोगों को काफी दिक्कत होती है। धार्मिक कार्यों के नाम पर लोगों की शांति भंग करना धर्म के भी खिलाफ है।
इस पर मौलाना अबुल इरफान मिंया फरंगी महली मस्जिदों में पांच वक्त की अजान का समय तय है। अजान दो से तीन मिनट तक ही होती है। मंदिरों में भी सुबह-शाम आरती का समय तय है। सरकार मंदिर व मस्जिद के लिए अनुमति की बाध्यता खत्म कर दे। हां कई धार्मिक आयोजन अधिक समय तक चलते हैं। इनके लिए आदेश लागू होना चाहिए।
मामले पर ईदगाह ऐशबाग के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का कहना है कि आदेश सियासी नहीं है। ध्वनि प्रदूषण पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट पहले ही ऐसा आदेश दे चुका है। हाईकोर्ट के आदेश पर प्रदेश सरकार ने सभी धार्मिक स्थलों के लिए सर्कुलर जारी किया है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। मस्जिद कमेटी जल्द से जल्द अनुमति की प्रक्रिया पूरी कर ले ताकि किसी तरह की दुश्वारी न हो।
मामले पर टीले वाली मस्जिद के इमाम मौलाना फजले मन्नान रहमानी का कहना है कि अनुमति लेने का आदेश न्यायालय का है और सभी मजहब के धर्मस्थलों के लिए एक समान है। इस पर अमल करने में कोई एतराज नहीं है। मंदिर, मस्जिद के नाम पर अनुमति देने में भेदभाव न किया जाए। सरकार ने इसके लिए 15 जनवरी तक का समय रखा है जो काफी कम है। इसे बढ़ाया जाए।
शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास नकवी कहते हैं कि मस्जिद और मंदिर को इस आदेश से अलग रखने की जरूरत है। मंदिरों को आसानी से अनुमति मिलने पर सरकार पर भेदभाव का आरोप लगेगा। वहीं, भ्रष्टाचार की आशंका भी बढ़ जाएगी। सरकार को चाहिए कि आरोपों से बचने के लिए मंदिर और मस्जिद को इस आदेश से अलग कर दे।