अगर सब कुछ ठीकठाक रहा तो लखनऊ में जल्द ही हिमालयन अनुसंधान केंद्र
खुलेगा।
यह जानकारी शुक्रवार को राजधानी पहुंचे जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया
(जीएसआई) के महानिदेशक सुरेश कुमार बधावन ने दी। इसके लिए मुख्य सचिव
जावेद उस्मानी से सैद्धांतिक सहमति बनी है।
बधावन ने बताया कि 66 साल बाद
भारत को दुनिया भर में भू-विज्ञान के क्षेत्र में प्रतिभा दिखाने का मौका
मिलेगा। यह मौका 2020 में आयोजित होने जा रही अंतरराष्ट्रीय भू-विज्ञान
कांग्रेस में मिलेगा।
महानिदेशक बधावन ने
शुक्रवार दोपहर को मुख्य सचिव जावेद उस्मानी से भी मुलाकात कर जीएसआई के
काम और इसके उपयोग पर चर्चा की।
उन्होंने जोर दिया कि अभी हमें जिओ पार्क व
म्यूजियम की स्थापना करनी है। जल्दी ही लखनऊ में हिमालयन अनुसंधान केंद्र
खोला जाएगा।
इससे पहले उन्होंने बताया कि
विश्व के बदलते हालात को देखते हुए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण को नये
कलेवर में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
केदारनाथ त्रासदी में
वैज्ञानिकों ने बेहतरीन काम किया। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय भूविज्ञान
कांग्रेस में टैलेंट दिखाना होगा।
2020 के आयोजन के लिए कनाडा के दावे को
हमारे देश ने पीछे छोड़ते हुए इसे प्राप्त किया है।
भूविज्ञान के क्षेत्र
में अंतर विभागीय सहयोग के बढ़ाने को उद्देश्य से जीएसआई व बीरबल साहनी
पुरावनस्पति विज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) के मध्य समझौता भी इस दौरान हुआ।