प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं पर और बोझ बढ़ाने की भूमिका बनाई जा रही है।
टैरिफ फिक्सिंग के आरोपों में घिरे कंसल्टेंट ने पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन को राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा 31 मई को जारी टैरिफ आदेश को अपीलेट ट्रिब्यूनल फार इलेक्ट्रिसिटी के समक्ष चुनौती देने की सलाह दी है।
कंसल्टेंट का कहना है कि टैरिफ आर्डर को चुनौती देकर पावर कॉर्पोरेशन अपने राजस्व में 3578 करोड़ रुपये का इजाफा कर सकता है।
इसमें सरकार की ओर से प्रस्तावित 2094 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी भी शामिल है।
दिलचस्प यह है कि कंसल्टेंट ने मामला अपीलेट ट्रिब्यूनल में ले जाने के लिए अपनी सेवाएं देने की पेशकश करने के साथ ही दिल्ली की एक कानूनी फर्म की सेवाएं भी लेने की पैरवी की है।
कंसल्टेंट की सलाह को हाथों हाथ लेते हुए पावर कॉर्पोरेशन इसका प्रस्ताव तैयार कराने में जुटा है। बखेड़ा न खड़ा हो इसलिए सारी कवायद बेहद गुपचुप तरीके से की जा रही है।
पावर कॉर्पोरेशन का वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) व टैरिफ प्रस्ताव तैयार कराने वाले कंसल्टेंट परसेप्ट 360 डिग्री ने कॉर्पोरेशन के निदेशक कामर्शियल को पत्र भेजकर टैरिफ आर्डर की चार मदों को अपीलेट ट्रिब्यूनल के समक्ष चुनौती देने की सलाह दी है।
कंसल्टेंट का कहना है कि रिटर्न ऑन इक्विटी, अतिरिक्त सब्सिडी तथा परिचालन एवं रखरखाव व्यय आदि के अनुमोदन को चुनौती देकर 3578 करोड़ रुपये राजस्व और हासिल किया जा सकता है।
ट्रिब्यूनल में अपील के लिए कंसल्टेंट ने आपसी सहमति की दरों पर अपनी सेवाएं देने तथा मामले की पैरवी के लिए दिल्ली की एक कानूनी फर्म और उसके वकील के नाम की भी पैरवी की है।
गौरतलब है, कॉर्पोरेशन के पास निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पैरवी करने के लिए वकीलों का पैनल मौजूद है।
पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) संजय सिंह ने रेगुलेटरी अफेयर यूनिट (आरएयू) को कंसल्टेंट के सुझावों के आधार पर प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। आरएयू इस काम में जुट गया है।
उधर, इसकी भनक लगते ही बढ़ी बिजली दरों को लेकर पिछले दो महीने से आंदोलन कर रहा राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद सक्रिय हो गया है।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने इस पर ऐतराज जताते हुए मुख्यमंत्री से टैरिफ फिक्सिंग के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।