तीन दशक के वैवाहिक जीवन के बाद महिला की तलाक की अर्जी को हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बेहद निराश करने वाला बताया। अदालत ने कहा, भारत जैसे देश में विवाह के तीस साल से ज्यादा बीतने के बाद गुस्से में तलाक के लिए अर्जी देना दिल तोड़ने वाला है।
अदालत ने वैलेंटाइन डे पर दंपती को हाईकोर्ट के मध्यस्थता और समझौता केंद्र आमंत्रित किया है, जहां प्रशिक्षित मध्यस्थ रिश्ते को टूटने से बचाने का प्रयास किया जाएगा। तलाक की यह अर्जी पियु कुंडू ने दायर की थी।
जस्टिस शबीहुल हसनैन और जस्टिस अनंत कुमार ने कहा कि मामले को मेरिट पर सुनने से पहले हम यह कहना चाहेंगे कि पियु की उम्र 50 वर्ष और पति की उम्र 62 वर्ष है। यह विवाह करीब 30 वर्ष चल चुका है। भारत जैसे देश में तीन दशक के विवाह के बाद भी ऐसे गुस्से में तलाक चाहने के मामले देखना बेहद निराशाजनक है।
यह भी सामने आया है कि मौजूदा मामले में दोनों पक्षों के बीच कई केस लगाए गए हैं। दोनों के इस विवाह से दो बच्चे हैं जो बड़े हो चुके हैं। अदालत की नजरों में यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी अगर ऐसे मामलों को जिनकी वजह से विवाह टूटने की नौबत आए, उन्हें दोनों पक्ष मिलकर सुलझाने और संभालने का प्रयास न करें।