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Lucknow News: अवैध निर्माण मामले पर हाईकोर्ट सख्त, जवाब दाखिल करने के लिए एलडीए ने मांगा एक हफ्ता

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हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ
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लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी में अवैध भवन निर्माण के मामलों में पूर्व में दिए गए आदेश के अनुपालन को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को शेष मामलों में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। बीते सोमवार को सुनवाई के दौरान एलडीए के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कुछ याचिकाओं में जवाबी हलफनामे दाखिल किए जा चुके हैं, जबकि अन्य याचिकाओं में जवाब दाखिल किया जाना शेष है, जिसे एक सप्ताह के भीतर दाखिल कर दिया जाएगा।

इस पर न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई फरवरी के पहले सप्ताह में तय करते हुए एलडीए को शेष मामलों में जवाब दाखिल करने का अवसर प्रदान किया। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने यह आदेश अवैध निर्माण से जुड़े स्वयं संज्ञान लेकर दर्ज जनहित याचिकाओं पर पारित किया। उल्लेखनीय है कि कोर्ट ने इसी वर्ष 12 फरवरी को शहर में अवैध इमारतों के निर्माण के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया था।
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इससे पूर्व 27 फरवरी 2025 को कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि सख्त कानूनी मनाही वाले अनधिकृत निर्माण को वैधता देने में सरकारी प्राधिकारियों के बीच स्पष्ट गठजोड़ नजर आता है। कोर्ट ने कहा था कि कानून को अपना काम करना चाहिए और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ समुचित कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही एलडीए को पूर्व में जारी निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था।
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क्ले स्क्वायर कॉम्प्लेक्स मामले पर की थी तल्ख टिप्पणी



हाईकोर्ट ने क्ले स्क्वायर के बहुमंजिला कॉम्प्लेक्स मामले में भी एलडीए की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था कि एलडीए ने नोटिस जारी करने, सीलिंग आदेश देने और डेवलपर को ढहाने का नोटिस देने के बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए। नतीजतन, न सिर्फ इमारत बिक गई, बल्कि इसके 15 अपार्टमेंट के निवासियों से स्थानीय प्राधिकारी भवन कर, जल कर और बिजली बिल भी वसूल रहे हैं। कोर्ट ने इसे सख्त कानूनी मनाही वाले अनधिकृत निर्माण को वैधता देने का स्पष्ट उदाहरण बताते हुए सरकारी अधिकारियों के आपसी गठजोड़ की ओर इशारा किया।
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