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डेंगू को लेकर हाईकोर्ट सख्त : राज्य सरकार व नगर निगम को ढिलाई न बरतने का दिया आदेश, जरूरी उपाय करें अधिकारी

Thu, 24 Nov 2022 05:25 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

अधिवक्ता एसके मिश्र का कहना था कि लखनऊ समेत प्रदेश में डेंगू, मलेरिया व वायरल बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। जबकि सरकारी अस्पतालों में जांच व दवाओं की सुविधा पूरी नहीं पड़ रही है। लोग परेशान है। इस पर कोर्ट ने सरकारी वकील से अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं के उच्चीकरण को लेकर जवाब मांगा था।
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लखनऊ हाईकोर्ट
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राजधानी समेत प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत समेत चिकित्सा सुविधाओं की कमी व डेंगू की रोकथाम मामले में सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट जिम्मेदारों के जवाब व कारवाई से कोर्ट संतुष्ट नहीं है। कोर्ट ने राज्य सरकार व नगर निगम लखनऊ के अफसरों को किसी तरह ढिलाई न बरतने का आदेश दिया है। साथ ही सरकारी व नगर निगम के जिम्मेदार अफसरों को शहर में स्वच्छता व मच्छरों की बाढ़ रोकने को और जरुरी उपाय करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि लखनऊ में अभी जरुरत के मुताबिक नगर निगम फागिंग नहीं करवा पा रहा है।

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न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर दिया। याचिका में डेंगू व अन्य मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम समेत सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं के मुद्दा उठाया गया है। अधिवक्ता एसके मिश्र का कहना था कि वर्तमान में राजधानी समेत प्रदेश में डेंगू, मलेरिया व वायरल बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। जबकि सरकारी अस्पतालों में जांच व दवाओं की सुविधा पूरी नहीं पड़ रही है। लोग परेशान है। इस पर कोर्ट ने सरकारी वकील से अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं के उच्चीकरण को लेकर जवाब मांगा था। खासतौर पर प्लाज्मा की उप्लब्धता के बारे में, जिसकी मरीजों को सख्त जरूरत है। कोर्ट ने नगर निगम से भी पूछा था कि डेंगू से बचाव व बुखार को रोकने को क्या कदम उठाए गए हैं? इसके तहत राज्य सरकार व नगर निगम लखनऊ के अधिवक्ताओं ने जवाब पेश किए। उधर, याची का कहना था कि कोर्ट के आदेश के बावजूद स्कूलों में मच्छर जनित बीमारियों को लेकर पर्याप्त उपाय नहीँ किए जा रहे हैं। याची का यह भी कहना था कि स्कूलों में की जा रही कारवाई का जिक्र भी जवाब में नहीं किया गया है।


पहले, कोर्ट ने कहा था कि सरकारी वकील हलफनामे में यह जिक्र करेंगें कि वर्ष 2016 के सम्बंधित कानून के तहत डेंगू,मलेरिया व कालाजार अदि को रोकने को क्या वांछित कदम उठाए जाने चाहिए थे? यह भी पूछा था कि क्या मच्छर जनित बीमारियों के नेशनल सेंटर के विशेषज्ञों से सिर्फ इन बीमारियों के इलाज के लिए सलाह मशविरा किया गया था या फिर इन इनकी रोकथाम के लिए भी राय ली गई थी? हलफनामे में यह भी जिक्र करने को कहा था कि लोगों को इन घातक बीमारियों से आगाह करने व इनसे बचाव को क्या उपाय सरकार ने किए हैं? और क्या उपाय किए जाने हैं? इसी तरह नगर आयुक्त को भी जवाबी हलफ़नामा दाखिल करने का आदेश दिया था कि शहर में आम तौर पर स्वच्छता, जलनिकासी व मच्छरों की बाढ़ को रोकने को नगर निगम क्या कदम उठा रहा है? साथ ही स्कूलों में भी इन बीमारियों की रोकथाम के उपाय व जागरूकता संबंधी निर्देश देकर कारवाई रिपोर्ट तलब की थी।

 

कोर्ट के आदेश पर चिकित्सा स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभागों समेत नगर निगम लखनऊ की तरफ से जवाब पेश किए गए। इन्हें देखकर कोर्ट ने कहा कि कई कदम उठाए गए हैं, हालांकि, खासतौर पर नगर निगम की तरफ से अभी और तेजी से प्रयास किए जाने की जरूरत है। कोर्ट ने एक अखबार में छपी खबर के हवाले से कहा कि डेंगू के केस बढ़ें हैं। इससे ऐसा लगता है कि नगर निगम की तरफ से जरुरत के मुताबिक फागिंग की कमी है। उधर, सरकारी वकील ने कहा कि पिछले तीन दिन में डेंगू के बढ़े केसों में खासी कमी आई है। इस पर अदालत ने सरकारी व नगर निगम अफसरों को किसी तरह की कोई ढिलाई न बरतने का आदेश दिया। साथ ही सरकारी व नगर निगम के जिम्मेदार अफसरों को शहर में स्वच्छता बनाए रखने व मच्छरों की बाढ़ रोकने को और जरुरी उपाय करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई दो दिसंबर को होगी।

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