याची के वकील ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 30 अप्रैल को की गई टिप्पणी का भी उल्लेख किया जिसमें शीर्ष अदालत ने कहा था कि रिपोर्टिंग करने अथवा अपनी शिकायत सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए किसी के खिलाफ एफआईआर नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अंतरिम राहत का आदेश पारित किया। साथ ही कोर्ट ने एफआईआर रद्द किए जा ने की मांग पर राज्य सरकार से छह सप्ताह में जवाब तलब भी किया है।