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17 साल पुरानी याचिका पर सुनवाई: किशोर गृहों की खस्ता हालत कितनी सुधरी? हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

Tue, 12 Aug 2025 08:37 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

किशोर गृहों की खस्ता हालत सुधारने के मामले में 2008 से लंबित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। गोंडा के एक केंद्र को धन मुहैया कराने का दावा खारिज करने पर जवाब तलब किया है। 
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लखनऊ हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के किशोर गृहों की खस्ता हालत सुधारने के मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट को बताया गया कि गोंडा की ग्रामीण विकास समिति चारू को मिशन वात्सल्य के तहत धन मुहैया कराने का दावा खारिज कर दिया गया है। इसपर कोर्ट ने केंद्र सरकार के संबंधित अफसर को इसका पूरक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 4 सितंबर को होगी।

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न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश वर्ष 2008 से लंबित अनूप गुप्ता की जनहित याचिका पर दिया। इसमें प्रदेश के किशोर संरक्षण गृहों की खस्ता हालत में सुधार समेत समय पर फंड मुहैया कराने के निर्देश दिए जाने का आग्रह किया गया है। पूर्व में मामले की सुनवाई के समय एक अधिवक्ता ने गोंडा जिले के बालगृह (बालिका) को वित्तीय सहायता न दिए जाने से वहां रह रही किशोरियों की दयनीय हालत कोर्ट को बताई थी। 

कोर्ट ने केंद्र से जवाब तलब किया

इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील से जवाब तलब किया था। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि गोंडा की समिति को धनराशि मुहैया कराने का दावा केंद्र ने खारिज कर दिया है। मामले के न्यायमित्र अधिवक्ता ने भी कहा कि समिति का दावा खारिज करने का कोई कारण नहीं दिया गया है। इस पर कोर्ट ने केंद्र से जवाब तलब किया है।

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