राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि दरगाह शरीफ के आसपास का क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है,यह नेपाल की खुली सीमा से सटा है। पहलगाम में पर्यटकों पर भयावह हमले को देखते हुए व भारत-नेपाल सीमा से आने -जाने वाली भीड़ के बीच राष्ट्रविरोधी और संदिग्ध तत्वों के घुसपैठ की प्रबल संभावना बनी रहती है। राज्य की ओर से यह भी कहा गया था कि इन दिनों पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण हालात हैं। ऐसे में यदि आकस्मिक रूप से आपातकाल घोषित करना पड़े तो भीड़ की उपस्थिति के कारण मेला क्षेत्र को पूर्णतः ब्लैकआउट करना संभव नहीं होगा, जिससे प्रशासनिक चुनौतियां कठिन हो सकती हैं।
कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार ने परिस्थितियों को देखते हुए और गोपनीय रिपोर्टों के आधार पर उर्स की अनुमति से इंकार किया था लेकिन अब वह आदेश अप्रभावी हो गया है, क्योंकि मेला अवधि समाप्त हो चुकी है। न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम व्यवस्था जिसमें धार्मिक रिवाजों के संपादन की अनुमति दी गई थी, ने राज्य सरकार की आशंकाओं को समाप्त कर दिया है। कोर्ट ने दरगाह शरीफ की प्रबंधन समिति को भी निर्देशित किया कि भविष्य में उर्स तथा मेला का प्रबंधन प्रभावी ढंग से किया जाए तथा प्रवेश स्थलों व अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
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