इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने फिल्म निर्माता शिरीष कुंदर द्वारा सीएम योगी आदित्यनाथ पर अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में पुलिस को जल्द विवेचना पूरी करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में एफआईआर 23 मार्च 2017 को ही दर्ज कराई गई थी। लेकिन, साढ़े पांच साल से अधिक समय बीतने के बाद भी पुलिस विवेचना पूरी नहीं कर सकी। कोर्ट ने पुलिस को यह भी आदेश दिया है कि जो पक्ष विवेचना में सहयोग न कर रहा हो, उसके खिलाफ यथोचित कदम उठाए जाएं।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान व न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की खंडपीठ ने मामले के वादी अमित कुमार तिवारी की याचिका पर पारित किया। याची का कहना था कि फिल्म निर्माता शिरीष कुंदर ने अपने ट्विटर हैंडल से मुख्यमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए अपमानजनक टिप्पणियां कीं। वादी की ओर से कहा गया कि शिरीष के इस कृत्य की उसने हजरतगंज थाने में एफआईआर भी लिखाई, लेकिन साढ़े पांच साल बाद भी पुलिस विवेचना पूरी नहीं कर सकी है। वहीं सरकारी वकील ने न्यायालय को बताया कि निष्पक्ष विवेचना की जा रही है।