हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राम जन्मभूमि मुद्दे पर बनी फिल्म का ट्रेलर यू-ट्यूब पर दिखाए जाने के खिलाफ दायर याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि याचिका महज सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए दायर की गई।
न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार अरोड़ा व न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जौहरी की खंडपीठ ने यह आदेश सहाबा एक्शन कमेटी लखनऊ के अध्यक्ष अब्दुल वाहिद फारुखी की याचिका पर दिए।
याची का कहना था कि इस फिल्म का एक संवाद मुसलमानों के एक वर्ग के लिए अपमानजनक व आपत्तिजनक है जो कानून की मंशा के खिलाफ है। याची के वकील सीबी पांडे का कहना था कि फिल्म को सेंसर बोर्ड से प्रमाणपत्र लिए बगैर नहीं दिखाया जा सकता, फिर भी इसके ट्रेलर को यू-ट्यूब पर दिखाया जा रहा है।
फिल्म के ट्रेलर में वही संवाद होने से सामाजिक समरसता प्रभावित हो सकती है। उधर, याचिका का विरोध करते हुए केंद्र सरकार के सहायक सालिसिटर जनरल एसबी पांडे का कहना था कि इसी मामले में बांबे हाईकोर्ट में एक अन्य याचिका पहले दाखिल हुई थी, जिसमें भी यही मुद्दा उठाया गया था।
पांडे ने याचिका पर बांबे हाईकोर्ट के आदेश को अदालत में पेश किया। उन्होंने दलील दी कि याचिका महज सस्ती लोकप्रियता के लिए दायर की गई जो खारिज किए जाने योग्य है। राज्य सरकार की तरफ से मुख्य स्थायी अधिवक्ता श्रीप्रकाश सिंह मौजूद रहे। बांबे हाईकोर्ट के आदेश को देखने व पक्षकारों को सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी गई।