2016 में हुई थी एलडीए की कार्रवाई
हाईकोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि 1979 में केवल अनुबंध के बाद तीनों जमीनों पर शारदा प्रताप ने कब्जा लिया। मूल भू-स्वामी जंगली प्रसाद के एससी वर्ग से होने की वजह से यूपी जेडएएलआर एक्ट के चलते सेल डीड नहीं कराई जा सकी।
हाईकोर्ट ने इस अनुबंध के पंजीकृत नहीं होने की वजह से वैध नहीं माना। इस जमीन का अवार्ड भी एलडीए द्वारा जमीन अधिग्रहण के समय 1987 में कर दिया गया। 29 नवंबर 2015 को एलडीए के संयुक्त सचिव की जांच रिपोर्ट में भी तीनों भूखंडों पर पूर्व मंत्री का अवैध कब्जा पाया गया। इसकी सूचना हाईकोर्ट को भी दी गई।
हाईकोर्ट के आदेश में कहा गया है कि यूपी जेएलएलआर एक्ट के सेक्शन 157ए में दिए नियम को शारदा प्रताप शुक्ला को कब्जा देते समय भू-स्वामी और उसके पुत्रों ने तोड़ा। ऐसे में जमीन ट्रांसफर की कार्रवाई शून्य हो गई और यह जमीन राज्य सरकार में निहित हो गई थी। इसके बाद 1985 में इस जमीन को अधिग्रहित करने और किसी को मुआवजा दिए जाने की जरूरत ही नहीं थी।
हाईकोर्ट में जो तथ्य पेश किए गए, उससे साफ हो रहा है कि एलडीए और आवास विभाग में बैठे अधिकारी करीब 30 साल तक पूर्व मंत्री और विधायक को सहयोग करते रहे। जमीन से कब्जा हटवाने की जगह शारदा प्रताप शुक्ला को विकास शुल्क जमा करके जमीन अधिग्रहण मुक्त करने से लेकर उस समय की वर्तमान कीमत पर भूखंड पर कब्जा बने रहने तक के ऑफर दिए गए।
यह अलग है कि पूर्व मंत्री ने इन प्रस्तावों को नहीं माना। हाईकोर्ट केआदेश पर 2016 में टीम कब्जा हटाने गई, लेकिन खानापूर्ति करके लौट आई। उल्टे बाउंड्री बना जमीन को सुरक्षित कर दिया गया। अब भी इस जमीन पर भूखंड नियोजित होने के बाद भी विकास कार्य नहीं कराए गए हैं।
पूर्व मंत्री से जमीन खाली कराए जाने के लिए एलडीए ने कभी सख्ती नहीं दिखाई। पहले कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं ही की गईं। खुद निर्माण तोड़ने के उलट पूर्व मंत्री के लोगों को ही जेसीबी और मशीनें सौंप दी गई थीं। अब पूर्व मंत्री के आवास को भी तोड़ना होगा। इसके अलावा पूर्व मंत्री ने जमीन के एक हिस्से को आयुर्वेदिक अस्पताल के लिए किराए पर दे रखा है। इसे भी हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में हटवाना होगा।
लाख जतन किए ताकि बचा रहे कब्जा
पूर्व मंत्री ने अपने कब्जे को बनाए रखने के लिए एलडीए को कई ऑफर दिए। एक बार पूरी जमीन पर पार्क बनाकर मंदिर बनाए रखने के लिए पत्र लिखा। इसकेबाद वहां आयुर्वेदिक अस्पताल भी बनवाने के लिए प्रस्ताव आया।