गन्ना किसानों के बकाया धन के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने अखिलेश सरकार को तगड़ा झटका दिया है। अब सरकार को 20 रूपये प्रति क्विंटल अधिक देकर भुगतान करना होगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश से आर्थिक संकट झेल रहे प्रदेश के लाखों गन्ना उत्पादकों को राहत मिली है। चीनी मिलें देरी से चलने और पेमेंट में विलंब से टूटे किसानों को अब एक किस्त में 280 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना मूल्य मिलेगा।
अभी तक उन्हें 260 रुपये के रेट से भुगतान हो रहा था, वह भी बहुत धीमी रफ्तार से। 20 रुपये क्विंटल अवशेष गन्ना मूल्य बाद में देने का आश्वासन दिया जा रहा था।
पेराई सीजन 2013-14 गन्ना किसानों के लिए अच्छा नहीं रहा। प्रदेश सरकार ने सत्र 2012-13 की तरह 280 रुपये क्विंटल मूल्य घोषित कर दिया।
हाईकोर्ट ने दिया था मिल चलाने का आदेश
पहली बार निजी क्षेत्र की मिलों ने पेराई सीजन शुरू होने से ठीक पहले 19 नवंबर 2013 को मिलें चलाने से इन्कार कर दिया। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन की याचिका पर हाईकोर्ट ने मिलें चलाने के आदेश दिए।
उस समय मिल मालिकों और सरकार के बीच तय हुआ कि 280 रुपये गन्ना मूल्य का दो किस्तों में भुगतान किया जाएगा। 260 रुपये तत्काल और 20 रुपये पेराई सत्र के अंत में। अभी तक मिलें 260 रुपये की दर से भुगतान कर रही हैं।
याद आया सत्र 2007-08
घोषणा के मुताबिक चीनी मिलों ने किसानों को समय से गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया। पेराई सत्र खत्म करने से पहले अवशेष गन्ना मूल्य के रूप में 20 रुपये क्विंटल भी अदा नहीं किया। मायूस किसानों को सत्र 2007-08 की याद आने लगी थी। तब शुगर मिलों ने घोषित रेट 125 के बजाय 110 रुपया दिया था।
किसान नेता वीएम सिंह ने 15 रुपया लंबित मूल्य दिलाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। और चार साल बाद इसका भुगतान हुआ। किसानों को आशंका थी कि इस बार भी 20 रुपये गन्ना मूल्य कहीं लंबा न फंस जाए।
हाईकोर्ट के फैसले से फीलगुड
सरकार द्वारा घोषित गन्ना मूल्य का एकमुश्त 280 रुपये रेट से भुगतान कराने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद किसान खुश हैं।
सहकारी गन्ना समिति संपूर्णानगर, लखीमपुर खीरी के अध्यक्ष विजय कुमार मिश्र और बस्ती के किसान नेता डॉ. अरविंद कुमार सिंह कहते हैं कि अदालती फैसले से तंगहाल किसानों को बड़ी राहत मिली है।
यह फैसला प्रदेश सरकार और गन्ना विभाग के लिए सबक है। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पिछले साल के बकाया मूल्य पर ब्याज न मिलने पर गन्ना विभाग को कटघरे में खड़ा किया है।
उनका कहना है कि चीनी मिलों को ब्याज माफी देने के लिए बनी कमेटी का इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद कोई औचित्य नहीं रह गया है।
8754 करोड़ रुपये हैं बकाया
किसानों का मिलों पर 8754.52 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। हाईकोर्ट ने अवकाश बाद अदालत खुलने के पहले ही दिन इस मामले को सुनवाई के लिए लगाया है।
बकाया भुगतान न होने पर गन्ना आयुक्त को जिम्मेदार मानने का आदेश देने से भी विभाग पर दबाव बढ़ गया है।
गन्ना विभाग ने हाईकोर्ट में बकाया मूल्य के आंकड़े 260 रुपये के रेट से दिए थे। याचिकाकर्ता वीएम सिंह की दखल के बाद कोर्ट ने 280 रुपये के रेट से बकाया मान कर भुगतान के आदेश दिए।
हाईकोर्ट ने कहा है कि संविधान के मुताबिक किसानों को भी सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है। यह अधिकार दिलाना सरकार का दायित्व है।