थाने के बारे में सोचें तो अपराधियों और उन्हें पकड़ने वाली सख्त पुलिस से भरी किसी इमारत की छवि दिमाग में आती है पर अब यही थाना एक व्याकुल पिता के लिए अपनी दो साल की बेटी से मिलने का भी स्थान बनेगा।
हाईकोर्ट ने पिता को राहत देते हुए अपनी बच्ची से मिलने की इजाजत तो दे दी है, लेकिन वह उससे गोमती नगर थाने में ही मिल सकेगा। इसके लिए कोर्ट ने थाने के एसएचओ को भी व्यवस्था करने को कहा है। यह मुलाकात आधे घंटे की ही होगी और इस दौरान वीडियोग्राफी की जाएगी।
इस मामले में पिता ने अपनी बेटी की कस्टडी को लेकर याचिका दायर की थी। इसकी सुनवाई के दौरान मां हाईकोर्ट में उपस्थित हुई और बताया कि वह चूंकि बच्ची की ‘नेचुरल गार्जियन’ है, इसलिए बच्ची उसके पास है। वह बच्ची की देखभाल कर रही है। ऐसे में यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
याची की ओर से कहा गया कि वह बच्ची का पिता है और इस नाते उसे कम से कम अपने बच्ची को देखने का अधिकार होना चाहिए। मां की ओर से इस पर सहमति जताई गई।
जस्टिस अनिल कुमार श्रीवास्तव द्वितीय ने अपने निर्णय में दोनों पक्षों की सहमति के तहत निर्देश दिया कि महीने में एक दिन आधे घंटे के लिए मां की मौजूदगी में पिता बच्ची से मिल सकेगा। याची को इस मुलाकात की वीडियोग्राफी करवाने और उसकी सीडी मुलाकात के तीन दिन के भीतर हाईकोर्ट में जमा करने के लिए भी कहा गया है। वहीं एसएचओ से कहा गया है कि वह पिता-बेटी के मिलने के लिए उचित व्यवस्था करें और उनकी सुरक्षा का भी ख्याल रखें।