उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश व लखनऊ में लगातार बढ़ते जा रहे वायु प्रदूषण पर गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने इस सिलसिले में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को तलब किया है। उन्हें इस संबंध में रिकॉर्ड और इस बाबत किए अध्ययन संबंधी दस्तावेज साथ लाने को कहा गया है।
न्यायमूर्ति शबीहुल हसनैन व न्यायमूर्ति सीडी सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश सक्षम फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया। इसमें मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए राजधानी में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने का मामला उठाया गया है। कहा गया कि पेट्रोल पंपों से कैंसर काजिंग फ्यूम्स (कैंसर कारक भाप) निकलती है, जो चिंताजनक है।
जनहित याचिका में यह भी कहा गया कि प्रदेश में पिछले 50 वर्षों में कुल छह हजार पेट्रोल पंप थे, अब नौ हजार पंप और खुलने जा रहे हैं। चिंता जताई गई है कि इससे समस्या और बढ़ जाएगी। याचिका में इसकी रोकथाम को प्रभावी कदम उठाए जाने के साथ पेट्रोल पंपों पर वेपर रिकवरी सिस्टम लगाने की भी मांग की गई। सुनवाई के दौरान मौजूद कई अधिवक्ताओं ने भी इसका समर्थन किया।
इस पर अदालत ने कहा कि लोगों के साथ आने वाली पीढ़ी का जीवन दांव पर है। प्रदूषण किसी नरसंहार से अधिक संख्या में लाखों की जिंदगी निगल जाता है। इस समस्या का सामना करने की जरूरत है। न्यायालय ने केंद्रीय प्रदूषण सचिव को एक मार्च को कोर्ट के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया है, जिससे समस्या के समाधान को कदम उठाने में सहयोग मिल सके।