लखनऊ। हाईकोर्ट ने लखनऊ के 88 गांवों में पेयजल संकट पर राज्य सरकार को संवेदनशीलता से काम करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पानी जीवन की मूलभूत आवश्यकता है। इसलिए ग्रामीणों की समस्या के स्थायी समाधान में देरी नहीं होनी चाहिए।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश उत्कर्ष लोक सेवा संस्थान की जनहित याचिका पर दिया। खंडपीठ ने पांच वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की प्रक्रिया में तेजी लाने का भी आदेश दिया। एक प्लांट के लिए बख्शी का तालाब के नगवामऊ गांव में जमीन मिल चुकी है, लेकिन प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी लंबित है। शेष चार प्लांटों के लिए अभी भूमि आवंटित नहीं हुई है। न्यायालय ने जिलाधिकारी को इस कार्य को प्राथमिकता पर रखने को कहा।
कोर्ट ने जल संकट से तत्काल राहत के लिए 30 झीलों के पुनरूद्धार पर भी शीघ्र निर्णय लेने का आदेश दिया। पूर्व आदेश के तहत 90 झीलों का निरीक्षण किया गया था, जिनमें से 30 झीलों को पुनरूद्धार के लिए उपयुक्त पाया गया है। जल निगम (नगरीय) की रिपोर्ट नगर विकास विभाग को भेजी जा चुकी है, जिस पर सरकार का निर्णय प्रतीक्षित है।इस मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को निर्धारित है।