फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डेंगू से मौतों पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, यूपी में क्यों न कर दें राष्ट्रपति शासन की सिफारिश

Wed, 26 Oct 2016 02:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने डेंगू से मौतें रोकने के लिए कारगर उपाय नहीं करने के लिए प्रदेश सरकार को जमकर फटकार लगाई है।
विज्ञापन


अफसरों के गलत हलफनामों से खफा जस्टिस एपी साही और जस्टिस डीके उपाध्याय की बेंच ने मुख्य सचिव राहुल भटनागर को 27 अक्तूबर को अदालत में तलब करते हुए यहां तक कह दिया कि वे बताएं कि यह संवैधानिक विफलता की स्थिति है तो क्यों न प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाए।

कोर्ट ने कहा, स्वास्थ्य विभाग नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने में बुरी तरह फेल साबित हुआ है। राजधानी में डेंगू से मौतों को लेकर राज्य सरकार की ओर से मंगलवार को पेश हलफनामे पर बेंच ने कहा, अफसर गलत हलफनामे दे रहे हैं, जो बताता है कि प्रदेश में संवैधानिक विफलता की स्थिति है। क्यों न अब हाईकोर्ट ही कोई संवैधानिक उपाय करे?
विज्ञापन


कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से पेश नई कार्रवाई रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए अफसरों को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा-डेंगू की रोकथाम के लिए किसी भी विभाग ने प्रभावी कदम नहीं उठाए। अफसर कहते हैं कि कार्रवाई कर रहे हैं। योजना बना रहे हैं। पर हकीकत यह है कि लोग डेंगू से मर रहे हैं। कड़े निर्देशों के बावजूद संतोषजनक रिपोर्ट तक नहीं दी जा सकी।

जो रिपोर्टें दीं, उनमें सही जानकारियां नहीं हैं। इस दौरान प्रमुख सचिव-स्वास्थ्य  अरुण कुमार सिन्हा, सचिव नगर विकास एसपी सिंह और लखनऊ के सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव सहित नगर निगम, एलडीए, आवास विकास परिषद, जल संस्थान के अफसर मौजूद थे।

हमारा असंतोष धारणाओं पर नहीं सरकार के हलफनामों पर आधारित

प्रदेश में आपात हालात हैं, स्वास्थ्य विभाग डेंगू की समस्या से निपटने में पूरी तरह विफल रहा है। इसके लिए मिले फंड का सही उपयोग क्यों नहीं हो रहा, विभाग यह तक नहीं बता पाया। हमें भरोसा हो चुका है कि प्रदेश में संवैधानिक तंत्र पूरी तरह विफल हो चुका है। हमारा असंतोष धारणाओं पर नहीं, बल्कि खुद सरकार के हलफनामों पर आधारित है। हमें मजबूर होकर कहना पड़ रहा है कि सरकार की ओर से डेंगू रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा 
ऐसे समय में जब प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह विफल हो गया हो, हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा और मुख्य सचिव को समन करना पड़ रहा है। अब वही बताएंगे कि असल में यह सब हो क्या रहा है? अगर वे भी नहीं बता पाए तो कोर्ट उचित आदेश पारित करेगी जिसमें संविधान के अनुसार ऐसे कदम लिए जाएंगे जो कानून व सरकार का सही प्रशासन सुनिश्चित कर सके।’

ज्योति इनवायरोटेक पर मेहरबानी क्यों ?
कोर्ट ने लखनऊ नगर निगम को फटकार लगाते हुए पूछा कि सफाई के लिए लगाई गई एजेंसी ज्योति इनवायरोटेक पर वह इतना मेहरबान क्यों है? साल 2013 में उसे अपना काम पूरा कर लेना चाहिए था, लेकिन अब तक कंपनी काम पूरा नहीं कर पाई है।
विज्ञापन

दोषी अफसरों पर होनी चाहिए थी सख्त कार्रवाई

केंद्र सरकार से राज्य को डेंगू व मलेरिया नियंत्रण के साल 2013-14 में मिले 24.98 करोड़ रुपये में से एक भी पैसा खर्च नहीं किया जा सका। अदालत को दी ताजा रिपोर्ट में प्रदेश सरकार ने बताया है कि साल 2014-15 और 2015-16 में भी केंद्र से दिए गए फंड का पूरा उपयोग नहीं हुआ।

याचिककर्ता सुरेश कुमार पांडेय के अधिवक्ता कुलदीपति त्रिपाठी ने बताया कि इस फंड में 25 प्रतिशत राशि राज्य को देनी होती है, जिसमें भी देरी होने की वजह से केंद्र का फंड ठीक से उपयोग नहीं हो सका। हाईकोर्ट ने इस पर भी असंतोष जताया और कहा कि दोषी अफसरों पर अब तक सख्त कार्रवाई हो जानी चाहिए थी। सरकार की सफाई, दायरे में हैं 50 अफसरः सरकार ने बताया है कि स्वास्थ्य विभाग के 50 अधिकारियों पर इसके लिए कार्रवाई की तैयारी  की जा रही है।

सीएम ने मुख्य सचिव को दिए दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शाम को मुख्य सचिव राहुल भटनागर को इस मामले की समीक्षा कर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार व दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, यह गंभीर मसला है। इसमें लापरवाह अफसरों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। हाईकोर्ट इस मसले पर पहले भी स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को चेतावनी दे चुका था इसके बावजूद अफसरों के रवैये में सुधार नहीं आया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें