इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने डेंगू से मौतें रोकने के लिए कारगर उपाय नहीं करने के लिए प्रदेश सरकार को जमकर फटकार लगाई है।
अफसरों के गलत हलफनामों से खफा जस्टिस एपी साही और जस्टिस डीके उपाध्याय की बेंच ने मुख्य सचिव राहुल भटनागर को 27 अक्तूबर को अदालत में तलब करते हुए यहां तक कह दिया कि वे बताएं कि यह संवैधानिक विफलता की स्थिति है तो क्यों न प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाए।
कोर्ट ने कहा, स्वास्थ्य विभाग नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने में बुरी तरह फेल साबित हुआ है। राजधानी में डेंगू से मौतों को लेकर राज्य सरकार की ओर से मंगलवार को पेश हलफनामे पर बेंच ने कहा, अफसर गलत हलफनामे दे रहे हैं, जो बताता है कि प्रदेश में संवैधानिक विफलता की स्थिति है। क्यों न अब हाईकोर्ट ही कोई संवैधानिक उपाय करे?
कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से पेश नई कार्रवाई रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए अफसरों को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा-डेंगू की रोकथाम के लिए किसी भी विभाग ने प्रभावी कदम नहीं उठाए। अफसर कहते हैं कि कार्रवाई कर रहे हैं। योजना बना रहे हैं। पर हकीकत यह है कि लोग डेंगू से मर रहे हैं। कड़े निर्देशों के बावजूद संतोषजनक रिपोर्ट तक नहीं दी जा सकी।
जो रिपोर्टें दीं, उनमें सही जानकारियां नहीं हैं। इस दौरान प्रमुख सचिव-स्वास्थ्य अरुण कुमार सिन्हा, सचिव नगर विकास एसपी सिंह और लखनऊ के सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव सहित नगर निगम, एलडीए, आवास विकास परिषद, जल संस्थान के अफसर मौजूद थे।