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कैसे हो रही सरकारी वकीलों की नियुक्ति: HC

Thu, 12 Dec 2013 03:44 PM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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सरकारी वकीलों की नियुक्ति में राजनैतिक हस्तक्षेप और मनमानापन रोकने के लिए दायर पीआईएल में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार से एक सप्ताह में जवाब माँगा है।
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मामले की अगली सुनवाई 03 जनवरी 2014 को होगी।

यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा दायर की गई थी।

जस्टिस इम्तियाज़ मुर्तजा और जस्टिस डीके उपाध्याय की बेंच ने राज्य सरकार से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट व विभिन्न ट्रिब्यूनल में वर्तमान में शासकीय वकीलों की नियुक्ति किस तरह की जा रही है।

डॉ ठाकुर के मुताबिक, सरकारी वकील उच्चतर न्यायालयों में राज्य के विधिक हितों की रक्षा करने का बेहद जरूरी और संवेदनशील काम करते हैं। इसके बावजूद, अतिरिक्त महाधिवक्ता से स्थायी अधिवक्ता तक सभी पदों पर पूरी तरह अंधेरगर्दी और रहस्यमयता है।
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डॉ. ठाकुर कहती हैं कि इन पदों की संख्या तक निश्चित नहीं है। ये सारी नियुक्तियां छिपे तौर-तरीके से राजनैतिक आधार पर की जाती हैं। इन वकीलों का ना तो कोई ड्यूटी चार्टर है, ना कार्य मूल्यांकन व्यवस्था और ना जवाबदेही।

इतने सरकारी वकील होने के बाद भी राज्य सरकार सरकारी धन का अपव्यय करते हुए अक्सर लाखों फीस देकर विशेष अधिवक्ता नियुक्त करती है, जिन्हें तत्काल समाप्त किया जाना जरूरी है।
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