लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने स्थानीय कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केंद्र (लिंब सेंटर) को कोविड-19 अस्पताल में तब्दील करने के केजीएमयू प्रशासन के निर्णय के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर राज्य सरकार समेत केजीएमयू से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने दोनों पक्षकारों के वकीलों को तीन दिन में संक्षिप्त जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल और न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की खंडपीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के बाद चैंबर में यह आदेश बंशगोपाल राष्ट्रीय पुनर्वास ट्रस्ट की जनहित याचिका पर दिया। इसमें केजीएमयू के रजिस्ट्रार के 15 मई के उस कार्यालय ज्ञाप को चुनौती दी गई है, जिसके तहत कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केंद्र को कोविड-19 अस्पताल में बदलने और केंद्र को शताब्दी अस्पताल फेज-2 की दूसरी व तीसरी मंजिल पर शिफ्ट किए जाने का निर्णय केजीएमयू प्रशासन ने लिया है। शुक्रवार को सुनवाई के समय राज्य सरकार व केजीएमयू के वकील पेश हुए, जिन्हें कोर्ट ने तीन दिन में संक्षिप्त जवाबी हलफ़नामा दाखिल करने का निर्देश देकर इसके बाद अर्जेंसी के मद्देनजर याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने को कहा है।