पेट्रोल-डीजल चोरी कर रहे पंप मालिकों के खिलाफ यूपी सरकार के रुख पर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मंगलवार को बेहद तल्ख टिप्पणियां कीं। अदालत ने कहा-एसटीएफ के पहले दिन की कार्रवाई के बाद सरकार के पास जनता को ठगी से बचाने का अच्छा मौका था।
पर, बचकाने और दब्बू रवैये के चलते सरकार इसमें नाकाम रही। पेट्रोल पंप मालिक जनता से दिन दहाडे़ ठगी कर रहे थे, पर जब वे पकड़े गए तो सरकार बातचीत के दौरान उनके सामने बिछ गई। पिछले दस दिन में यह दूसरी दफा है जब अदालत ने इस मामले में सरकार को आड़े हाथ लिया।
अधिवक्ता डॉ. अशोक निगम की याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस वीरेंद्र कुमार - द्वितीय ने कहा-केंद्र सरकार ने 1999 के एक आदेश में साफ कर दिया था कि सप्लाई में कोई दिक्कत आने पर सरकार पेट्रोल पंपों का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है।
लेकिन इनका उपयोग कर सख्त कदम उठाने के बजाय सरकार ने पेट्रोल पंप मालिकों की धमकियों के आगे घुटने टेक दिए। पेट्रोल पंप मालिक पूरे जांच और ऑपरेशन को नाकाम करने में सफल रहे।
तेल कंपनियां केंद्र सरकार के नियंत्रण में हैं, लेकिन सरकार ठग पेट्रोल पंप वालों और अफसरों पर कार्रवाई करने के बजाय खुद को साफ दिखाने का प्रयास कर रही है। वे सभी अपराध कर रहे हैं। ऐसे में एसटीएफ के अधिकारी कुंठित हो रहे हैं, उनकी बेबसी समझी जा सकती है।