हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने आतंकी घटनाओं के आरोपियों से मुकदमा वापसी की राज्य सरकार की मुहिम संबंधी आदेश मांगा है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि 29 अगस्त को प्रमुख सचिव गृह के हलफनामे के साथ मुकदमा वापसी का सरकारी आदेश कोर्ट में पेश किया जाए।
साथ ही कोर्ट ने आतंकी घटनाओं के मामलों में लगाई गई चार्जशीटों समेत इनकी स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की है।
न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह, न्यायमूर्ति अजय लांबा एवं न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार सिंह की वृहद पीठ ने गुरुवार को यह आदेश रंजना अग्निहोत्री समेत छह स्थानीय वकीलों की जनहित याचिका (पीआइएल) पर दिया।
इस मामले में 7 जून को दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने मुकदमा वापसी के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले को बड़ी बेंच के सुपुर्द कर दिया था। इसके बाद तीन न्यायाधीशों की बड़ी बेंच ने गुरुवार को मामले की सुनवाई की।
इस याचिका में विभिन्न आतंकी हमलों व सीरियल ब्लास्ट केआरोपियों के केस वापसी संबंधी राज्य सरकार के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।
साथ ही केस वापसी संबंधी कानूनी प्रावधान को असंवैधानिक घोषित कर इसे खत्म करने का भी आग्रह किया गया है। याचियों के वकील हरिशंकर जैन ने अस्वस्थ होने की बात कहकर मामले को मुल्तवी करने का आग्रह किया।
राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने शासकीय अधिवक्ता रिशाद मुर्तजा के साथ मामले में अटार्नी जनरल को नोटिस जारी करने की गुजारिश की क्योंकि इसमें मुकदमा वापसी संबंधी केंद्रीय कानून के प्रावधान को चुनौती दी गई है।
कोर्ट ने अगली सुनवाई 29 अगस्त को रख कर ब्यौरा तलब किया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी मामलों की एफआईआर व आरोप पत्रों की प्रतियां पेश करे और संबंधित मुकदमों की स्थिति का जिक्र करें। साथ ही कहा है कि पक्षकारों केवकील 23 अगस्त तक अपनी लिखित बहस आदि दाखिल करें।