बाराबंकी। नौ साल की कड़ी मेहनत के साथ ही अकेले दम पर सभी कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी बखूबी निभाने का परिणाम आखिरकार शिक्षिका वंदना श्रीवास्तव को मिल ही गया।
शासन ने उनके विद्यालय को उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में चयनित कर राज्य पुरस्कार के लिए चुना है। इसकी सूचना मिलते ही शिक्षिका से लेकर स्कूल के छात्र-छात्राएं भी प्रफुल्लित हैं।
हम बात कर रहे हैं देवा विकासखंड क्षेत्र के अंग्रेजी माध्यम पूर्व माध्यमिक विद्यालय हीरपुर देवा की। जहां की शिक्षिका वंदना श्रीवास्तव की मेहनत आखिरकार रंग ले ही आई।
14 जुलाई 2010 में जब वंदना श्रीवास्तव का तबादला इस विद्यालय में हुआ था तो यहां की शिक्षा व्यवस्था पटरी से उतरी हुई थी। मगर वंदना ने अपने बलबूते पर सरकारी संसाधनों से लेकर निजी संसाधनों तक का इस्तेमाल कर स्कूल और छात्र-छात्राओं को निखारने के लिए कड़ी मेहनत की।
इसी के बाद वर्ष 2019 के लिए इस स्कूल का चयन अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के रूप में किया गया। स्कूल की शैक्षिक गुणवत्ता, परिसर की साज-सज्जा, छात्र-छात्राओं के ड्रेस मेंटेनेंस से लेकर लैपटॉप व टैबलेट से हाईटेक पढ़ाई से इस स्कूल की खास पहचान बन गई है।
वर्तमान में इस विद्यालय में कुल 166 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। एक वर्ष पहले विद्यालय के तत्कालीन प्रधानाचार्य राजदेव यादव का रिटायरमेंट के बाद से शिक्षिका वंदना श्रीवास्तव यहां अकेले ही सब कुछ मैनेज कर रही हैं।
बताते हैं कि ग्राम हीरपुर के अलावा आसपास के कैमबई, उदवतपुर, बैसुवा, सालेनगर आदि गांवों के बच्चे भी अच्छी पढ़ाई के लिए इसी स्कूल में आते हैं।
इस स्कूल को शैक्षिक गुणवत्ता, सुसज्जित विद्यालय प्रांगण और कान्वेंट की तरह चलने वाली कक्षाओं की खूबियों के चलते उत्कर्ष विद्यालय के रूप में इस बार चयनित किया गया है।
इसके तहत इस विद्यालय को राज्य पुरस्कार दिया जाएगा। राज्य पुरस्कार के लिए इस विद्यालय के चयनित होने से विकासखंड क्षेत्र के शिक्षक, छात्र-छात्राओं व अभिभावकों से लेकर स्कूल स्टाफ सभी प्रफुल्लित हैं।
शिक्षिका वंदना श्रीवास्तव का कहना है कि राज्य पुरस्कार के लिए इस विद्यालय का चयन उनके लिए गर्व की बात है। उनका कहना है कि सरकारी विद्यालयों में यदि शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता और छात्र-छात्राओं पर ध्यान दें तो ये भी प्राइवेट स्कूलों की बराबरी कर सकते हैं।