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Lucknow News: महाराष्ट्र में भारी बारिश से अरहर की फसल प्रभावित, 12 रुपये किलो महंगी हुई दाल

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महाराष्ट्र में भारी बारिश से अरहर की फसल प्रभावित, 12 रुपये किलो महंगी हुई दाल
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लखनऊ। महाराष्ट्र में इस वर्ष हुई ज्यादा बारिश के कारण दिसंबर में आने वाली अरहर दाल की फसल प्रभावित हुई है। इसके चलते एक महीने में ही अरहर दाल 12 रुपये किलो महंगी हो गई है। कारोबारी बारिश से फसल के नुकसान व स्टॉक कम बचा होने को इसकी वजह बता रहे हैं। इसके अलावा मटर दाल के दाम में भी दो रुपये किलो की तेजी आई है।
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एक महीने पहले अरहर दाल का रेट 108-110 रुपये प्रति किलो था। व्यापारी बताते हैं कि दाम बढ़ना शुरु हुए जो 115 रुपये तक गए। करीब एक हफ्ते पहले फिर से 5 रुपये दाम बढ़े हैं। जो अब 120-122 रुपये तक पहुंच गए हैं।

पांडेयगंज स्थित गल्ला मंडी के कारोबारी व लखनऊ व्यापार मंडल के चेयरमैन राजेंद्र अग्रवाल बताते हैं कि 180 रुपये किलो तक में बिकने वाली अरहर दाल इस वर्ष 90-95 रुपये तक बिक चुकी है। इसलिए दाम में तेजी आना स्वाभाविक है और यह दिसंबर तक रहेगी। जनवरी में नई फसल आने के बाद दाम कम हो सकते हैं। चना, मटर, उड़द जैसे अन्य दलहनों की फसल मार्च तक आएगी। इसलिए इनमें बहुत तेजी नहीं आई है। (संवाद)
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महाराष्ट्र और कर्नाटक से आती है अरहर दाल
महाराष्ट्र के अकोला और नागपुर से सबसे ज्यादा अरहर दाल आती है। हालांकि, अरहर दाल की पहली फसल कर्नाटक में तैयार होती है। 15 दिसंबर तक बाजार में कर्नाटक से नई फसल आ जाएगी, जबकि जनवरी में महाराष्ट्र से दाल की भारी आवक हो जाएगी। इसके बाद ही दाल की कीमतों में गिरावट देखने को मिलेगी।


मटर दाल का उत्पादन सिर्फ 10 प्रतिशत, आयात 90 प्रतिशत

महीनेभर पहले मटर दाल के दाम 38-40 रुपये प्रति किलो थे जो अब 40-42 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। कारोबारी राजेंद्र अग्रवाल बताते हैं कि बुंदेलखंड और कानपुर क्षेत्र में मटर दाल की पैदावार सबसे ज्यादा है। फिर भी कुल खपत के सापेक्ष यहां उत्पादन सिर्फ 10 प्रतिशत ही है। शेष 90 प्रतिशत मटर का आयात कनाडा और रूस से होता है। स्थानीय किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार आयातित मटर पर आयात शुल्क लगाने पर विचार कर रही है। इसकी वजह से भी दाम में तेजी आई है। वहीं दिवाली और फिर छठ की वजह से कारोबारियों को आयातित मटर की अनलोडिंग के लिए श्रमिक नहीं मिल पा रहे हैं। इस कारण बंदरगाहों पर मटर से लदे जहाज खड़े हैं।

अरहर और मटर दाल की खपत सबसे ज्यादा
दलहन कारोबारियों के मुताबिक बाजार में अरहर और मटर दाल की खपत सबसे ज्यादा है। अगर ऐसा न हो तो अन्य दालों की कीमतें आसमान पर पहुंच जाएं। मटर का इस्तेमाल दाल से लेकर छोले और बेसन के रूप में होता है। छोटे व्यापारी चने के बेसन की बजाय मटर के बेसन को तरजीह देते हैं। इससे भी खपत ज्यादा है।
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