सिविल अस्पताल की कैथ लैब फिर से शुरू हो गई। इससे गरीब मरीजों को दिल की जांच के लिए लारी कार्डियोलॉजी, एसजीपीजीआई और लोहिया इंस्टीट्यूट जैसे संस्थानों में नहीं जाना पड़ेगा।
मात्र 400 रुपये में ही दिल को खून पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट की जांच हो सकेगी। सरकारी अस्पताल में दिल के रोगियों को सस्ता और बढ़िया इलाज देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तीन करोड़ रुपये खर्च कर सिविल अस्पताल में कैथ लैब बनवायी थी।
ये प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल था जहां कैथ लैब की सुविधा थी। जिससे हार्ट अटैक के रोगियों के दिल की धमनियों में रुकावट की जांच की जा सके।
इस कवायद में जापानी कंपनी शिमाट्जू ने करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से अस्पताल के पहले तल पर स्थित ऑपरेशन थिएटर में कैथ लैब का निर्माण कराया।