स्वास्थ्यमंत्री अहमद हसन ने लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल का निरीक्षण किया। उनके निरीक्षण के दौरान ही अस्पताल में डॉक्टरों और दलालों के सांठगांठ की पोल स्वास्थ्यमंत्री के सामने खुल गई।
मौके पर कुछ संविदा डॉक्टर नहीं मिले। इन डॉक्टरों की छुट्टी या न आने की कोई सूचना अस्पताल प्रशासन के पास नहीं थी। औचक दौरा खत्म हाते ही इन चारों संविदा डॉक्टरों की सेवाएं अस्पताल से खत्म कर दी गईं। डा. एके निगम, डा. डीपी मिश्रा, डा एके शुक्ला और डा बीएस शुक्ला की सेवाएं अब अस्पताल के साथ नहीं रहीं।
अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों के पास बाहर की जांच रिपोर्ट देख स्वास्थ्यमंत्री अहमद हसन इस कदर बौखलाए की उन्होंने ये तक कह दिया कि यह अस्पताल दलालों का अड्डा बन गया है।
इस मौके पर साथ में मौजूद अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि कुर्सी पर बैठने से नहीं होगा। व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए कमरे से बाहर निकलना पड़ेगा। औचक निरीक्षण के दौरान रेडियोलॉजी विभाग में डॉक्टर गायब मिले।
पूछताछ पर गोलमाल जवाब मिलने के बाद नाराजगी जाहिर की और प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को बदतर हालात को देखने के लिए कहा। इसके बाद दवा काउंटर नंबर सात पर पहुंचे तो वहां दोपहर एक बजे ही ताला बंद मिला। दवा काउंटर पर किसी दवा का कोई रिकॉर्ड नहीं था। स्टॉक रजिस्टर की जांच की तो वो पूरी तरह खाली मिला जिसके बाद वो गुस्से से लाल हो गए।
दलालों का अस्पताल हो गया है
स्वास्थ्यमंत्री अहमद हसन दोपहर करीब साढ़े बारह बजे अस्पताल के कार्डियक वार्ड पहुंचे। वहां मरीजों से हालचाल लेते हुए बेड नंबर आठ पर भर्ती मो. जुबैर (50) को सीने में दर्द की शिकायत के बाद बीस दिन पहले भर्ती कराया गया। मो. जुबैर ने बताया कि बीस दिन में पांच बार बाहर से जांच लिखी गई और तीन हजार से अधिक की जांचे करवा चुके हैं पर राहत कुछ नहीं है।
स्वास्थ्यमंत्री अहमद हसन ने मरीज के पास चरक पैथोलॉजी की जांच रिपोर्ट देखी तो आग बबूला हो गए और कहा कि दलालों का अस्पताल बन गया है। रोज अखबारों में दलाली की खबर छपती है पर रोक लगाने वाला कोई नहीं है।
अस्पताल के निदेशक डॉ. यूएन राय ने बताया कि मो. जुबैर का इलाज अस्पताल में पुर्ननियुक्ति पर तैनात डॉ. वीएस शुक्ला कर रहे हैं तो भड़क गए और कह दिया कि कल से ये डॉक्टर अस्पताल में नहीं दिखना चाहिए। डॉक्टर अस्पताल में तैनात है और बाहर से जांच और दवा लिखकर सरकार की छवि खराब कर रहा है। ऐसे डॉक्टर को किस आधार पर अस्पताल में रखा गया है।
स्वास्थ्यमंत्री के गुस्सा होते देख उनके साथ मौजूद अधिकारियों ने मरीज का नाम पता लेने के साथ डॉ. वीएस शुक्ला का नाम नोट कर लिया और वहां से चलते बने। स्वास्थ्य मंत्री ने वार्ड में भर्ती मरीजों से कहा कि कोई भी जांच बाहर से नहीं कराएगा। अगर कोई डॉक्टर जोर जबरदस्ती करता है तो उसकी शिकायत करिए उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दौड़ा-दौड़ा कर पीटो दलालो को
ओल्ड बिल्डिंग के कार्डियक वार्ड से स्वास्थ्यमंत्री बाहर निकले तो तीमारदारों से उन्होंने कहा कि दलाल अस्पताल में आता है तो उसे दौड़ा-दौड़ा कर पीटो। अस्पताल में सभी सुविधाएं हैं और बाहर से जांच कराने का कोई नियम नहीं है। अस्पताल के अधिकारियों को फटकारते हुए कहा कि आप लोग क्या कर रहे हैं। मरीज की बाहर से जांच हो रही और किसी को कुछ पता नहीं लगता है और जमकर दलाली हो रही है।
सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक के तीसरे तल पर बैठने वाले एक डॉक्टर को दिखाने के बाद वापस लौट रही साबरा बेगम (50) का सामना स्वास्थ्यमंत्री अहमद हसन से हुआ तो उन्होंने उनका हालचाल पूछ लिया। बीमारी से तंग साबरा बेगम ने कहा कि साहब सुबह नौ बजे ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे थे लेकिन डॉक्टर साहब एक बजे मिले।
साबरा ने बताया कि उनका इलाज डॉ. एसएम रिजवी कर रहे हैं। जब वो ओपीडी पहुंची तो डॉक्टर मरीज को देखने दूसरे वार्ड में गए थे। जब दोबारा ओपीडी आए तो मेडिकल रिप्रजेंटेटिव से घंटों बात करते रहे और डेढ़ बजे इलाज नसीब नहीं हो सका।
इस बात से नाराज स्वास्थ्यमंत्री और प्रमुख सचिव ने निदेशक, सीएमएस और एमएस को चेतावनी देते हुए कहा कि आज के बाद अस्पताल में कोई एमआर नहीं आना चाहिए। सभी दवाएं अस्पताल में है तो एमआर का क्या काम और संबंधित डॉक्टर का नाम नोट कर कार्रवाई की बात कही।