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Lucknow News: सीने में था ट्यूमर, डॉक्टर खिला रहे थे टीबी की दवा

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केजीएमयू।
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लखनऊ। डॉक्टर टीबी की बीमारी समझकर युवती का लंबे समय तक इलाज करते रहे, मगर कोई राहत नहीं मिली। युवती ने केजीएमयू में डॉक्टरों को दिखाया। जांच में पता चला कि युवती के सीने में ट्यूमर है। डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर ढाई किलो का ट्यूमर निकालकर युवती को नई जिंदगी दी है। यह ट्यूमर इतना बड़ा था कि मरीज का दायां फेफड़ा पूरी तरह सिकुड़ चुका था। दिल के साथ मुख्य धमनी (एओर्टा) पर भी खतरनाक दबाव बना रहा था, जिससे युवती को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। पल्स सामान्य से दोगुनी थी।
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सदर स्थित उदयगंज निवासी शगुन को जून 2025 से सीने में दर्द, भारीपन, सांस फूलने और दिल की धड़कन तेज होने की शिकायत थी। पिता विमल यादव ने बेटी को नजदीक की क्लीनिक में दिखाया। डॉक्टर ने पल्स पर काबू पाने की दवा दी। एक माह दवा खाई, मगर जनवरी में तबीयत और बिगड़ गई। अब बुखार भी आने लगा। स्थानीय डॉक्टर ने एक्सरे कराई, जिसमें फेफड़े में पानी भरने की आशंका जाहिर की।
डॉक्टर ने मरीज को आईटी कॉलेज स्थित निजी अस्पताल रेफर कर दिया। यहां डॉक्टरों ने छाती से पानी निकालकर जांच कराई और टीबी की दवा शुरू कर दी। हालत में कुछ सुधार तो हुआ, मगर गलत इलाज की वजह से कुछ दिनों बाद उल्टियां होने लगीं। हालत बिगड़ने पर दोबारा जांच कराई गई। सीटी स्कैन और बायोप्सी में पल्मोनरी हैमार्टोमा का संदेह जताया गया। फेफड़े का हिस्सा निकालने की सलाह दी गई।
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छह अप्रैल को परिजन मरीज को लेकर केजीएमयू पहुंचे। चिकित्सा अधीक्षक व जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. सुरेश कुमार के निर्देशन में इलाज शुरू हुआ। जांच में जर्म सेल ट्यूमर (मैच्योर टेराटोमा) की आशंका जाहिर की, जिसके बाद दोबारा सीटी स्कैन और बायोप्सी कराई गई। जांच में पुष्टि हुई कि सीने के एंटीरियर मेडियास्टिनम में बड़ा ट्यूमर है। इसमें मांस, हड्डी व बाल थे। ऐसा ट्यूमर दो लाख में एक मरीज में होता है।
पांच घंटे तक चला ऑपरेशन
डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि 21 अप्रैल को ऑपरेशन किया गया। करीब पांच घंटे हुए ऑपरेशन के दौरान 2.5 किलो का ट्यूमर निकाल लिया गया। ट्यूमर हटाते ही सिकुड़ा हुआ फेफड़ा दोबारा फैल गया। स्थिति में तेजी से सुधार भी हुआ। ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू-वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। नौ दिन बाद सीने की नली हटाकर शनिवार को डिस्चार्ज कर दिया गया।
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ऑपरेशन टीम के सदस्य
डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. मिथिलेश वर्मा, डॉ. संजीव पूर्ति, डॉ. वैभव अग्रवाल, डॉ. नीतू सिंह, एनस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. विनोद श्रीवास्तव आदि।
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