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हाईकोर्ट सख्त, अखिलेश सरकार को 24 घंटे का वक्त!

Wed, 13 Aug 2014 11:26 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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सूबे में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के बढ़ते मामलों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा है कि महज सर्कुलर जारी करने या समितियां बना देने भर से महिलाओं के खिलाफ अपराधों से राहत नहीं मिल सकती।

इसके लिए जमीनी हालात पर गौर करना होगा। प्रदेश सरकार के स्तर पर ऐसे अपराधों में निहित मूल मुद्दों तक पहुंचने का समाधान तलाशना चाहिए।

'उठाए जा सकते हैं तत्काल कदम'

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ. धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ एवं न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने एक लंबित पीआईएल पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए।

बेंच ने कहा कि राज्य सरकार ऐसे इलाकों को चिह्नित कर सकती है, जहां महिलाओं के खिलाफ अपराधों की बहुलता है।

इससे ऐसे मामलों में तत्काल कदम उठाए जा सकेंगे। कोर्ट ने राज्य सरकार को ऐसे मामलों में उठाए गए कदमों की जानकारी देने के लिए 14 अगस्त तक का वक्त दिया है।

मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। पीआईएल में सूबे में महिलाओं पर बढ़ रहे अपराधों पर प्रभावी अंकुश के लिए सख्त इंतजाम किए जाने की गुजारिश की गई है।

सरकार ने कोर्ट को ये बताया

कोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार की तरफ से 25 जुलाई को अदालत को बताया गया कि डीजीपी ने पांच महिला पुलिस अफसरों की एक ‘महिला सेल’ गठित की है।तीन वरिष्ठ महिला पुलिस अफसरों की निगरानी समिति बनाई गई है।वीमेन पावर लाइन नंबर (1090) 24 घंटे उपलब्ध है।मुसीबत में फंसी किसी भी महिला तक पहुंचने के लिए ‘मोबाइल पुलिस एप्लीकेशन’ भी विकसित की गई है।पीड़िताओं की मदद के लिए जोन स्तर पर काउंसलर्स की व्यवस्था है।फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन की कार्रवाई चल रही है। इसके लिए सूबे के मुख्य सचिव उच्च स्तरीय बैठक कर रहे हैं।
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कोर्ट ने ये दिया हुक्म

इस जमीनी हालात पर गौर करना होगा कि महज सर्कुलर जारी करने से राहत नहीं मिल सकती। समितियां बनाने से महिलाओं के खिलाफ अपराधों से निपटने, गिरफ्तारी व तफ्तीश का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों की भयावहता को देखते हुए पुलिस को भी पूरी तरह संवेदनशील बनाना होगा।अदालत ने साफ कहा कि इस मामले का लंबित रहना, राज्य सरकार को कोई कार्ययोजना लागू करने संबंधी जरूरी निर्णय लेने में बाधक नहीं होगा।
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