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केंद्रीय मंत्री की सिफारिश पर दर्ज मुकदमें में खेल, हजरतगंज पुलिस ने 24 घंट में डकैती की धारा मारपीट में बदली

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हजरतगंज के हलवासिया कोर्ट में एक प्रोडक्शन हाउस है। उसके मालिक सुबोध बाजपेयी को बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी के करीबी जालसाजों व शातिर ठगों ने असलहे की नोंक पर बंधक बनाकर मारापीटा। पीड़ित ने एक जून को तहरीर दी।
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जिस पर जांच की बात कर टालमटोल किया जा रहा था। इस पर पीड़ित ने केंद्रीय मंत्री से सिफारिश लगवाई। केंद्रीय मंत्री ने पुलिस कमिश्नर को मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा।
इस पर पुलिस ने छह जून को मुकदमा तो दर्ज कर लिया। लेकिन महज 24 घंटे में शातिर अपराधियों पर मेहरबानी करते हुए डकैती की धारा में दर्ज मुकदमे को मारपीट, धमकी की धारा में तरमीम कर दिया।
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पीड़ित ने इसकी जानकारी होने पर कहा कि हजरतगंज पुलिस पर भरोसा नहीं रह गया है। इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से करेंगे।
प्रोडक्शन हाउस के मालिक सुबोध बाजपेयी का कार्यालय हलवासिया कोर्ट में है। आरोप है कि 30 मई को सुबोध बाजपेयी और उनके चालक को मुख्तार अंसारी के करीबी ठगी व दुष्कर्म के आरोपी जैन अंसारी उर्फ सद्दन अंसारी, इमरान, राहुल गर्ग, कृष्णा सिंह व अश्वनी मिश्रा सहित सात अन्य लोगों ने घेर लिया।
दोनों को असलहा दिखाकर बंधक बनाया। उनकी पिटाई की। उनके जेवरात व बैग लूट लिया। पीड़ित के मुताबिक बैग में मां के इलाज के लिए रखे हुए पांच लाख रुपये थे।
सुबोध ने इसकी तहरीर हजरतगंज थाने में दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने से इनकार कर दिया। इस पर उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई।
पीड़ित की तहरीर पर जांच का हवाला देते हुए पुलिस टालमटोल करने लगी। इसी बीच पीड़ित ने अपने एक परिचित के जरिए केंद्रीय मंत्री से गुहार लगाई।
केंद्रीय मंत्री की कॉल आने के बाद पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर के हस्तक्षेप पर हजरतगंज में सुबोध की तहरीर पर सभी आरोपियों के खिलाफ डकैती की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया।
इसके बाद महज 24 घंटे में पुलिस ने मामले की धारा बदल डाली। आरोपियों के खिलाफ डकैती की धारा हटाते हुए बलवा, धमकी और मारपीट की धारा लगा दी।
पुलिस पर भरोसा नहीं, मुख्यमंत्री से करेंगे शिकायत
सुबोध ने कहा कि पुलिस पर भरोसा ही नहीं रहा है। हजरतगंज पुलिस शुरू से ही अपराधियों पर मेहरबानी कर रही थी। पहले तो मुकदमा लिखने को तैयार नहीं थी। केंद्रीय मंत्री की सिफारिश पर मुकदमा तो दर्ज कर लिया पर शातिर अपराधियों को बचाने में जुट गई। इसका परिणाम है कि बिना वादी के बयान दर्ज कराए मुकदमे की धाराओं में बदलाव कर लिया। सुबोध ने कहा कि इसकी शिकायत एक-दो दिन में दिल्ली से आकर पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर करेंगे। वहीं, मुख्यमंत्री से मिलकर पुलिस की इस कारस्तानी की जानकारी देंगे। संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे। इस मामले में प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज श्याम बाबू शुक्ला ने जानकारी होने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई जानकारी उनके पास नहीं है।
आरोपियों पर दर्ज हैं दर्जनभर मुकदमे
हजरतगंज पुलिस जिन शातिर अपराधियों को बचाने में जुटी है। उन पर हजरतगंज, अमीनाबाद, महिला थाने, वजीरगंज, कृष्णानगर सहित कई थानों में मुकदमे दर्ज हैं। सभी पर जाली दस्तावेज तैयार करने सहित कई गंभीर धाराएं भी लगी हैं। इसमें एक आरोपी के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल कर दी है।
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नहीं मिल रहे इन सवालों के जवाब
- पुलिस ने छह दिनों तक कौन सी जांच की, जिसमें यह पता ही नहीं चल सका कि मामला क्या है?
- हलवासिया कोर्ट में सीसीटीवी कैमरे लगे है, उनके डीवीआर कहां गए?
- मुकदमा दर्ज होने के 24 घंटे में कौन सी जांच की गई, जिसके आधार आनन-फानन में डकैती की धारा बदल दी गई?
- अगर सिर्फ मारपीट थी तो क्यों नहीं उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी देकर उसी धारा में शुरू से ही मुकदमा दर्ज किया गया?
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