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सुना है क्या: आज 'ब्लैक लिस्टेड माफिया बेखौफ' की कहानी, साथ 'ही महाठग आ न सका, माहौल की निकली हवा' के किस्से

Sat, 21 Mar 2026 01:15 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'ब्लैक लिस्टेड माफिया बेखौफ' की कहानी। इसके अलावा 'महाठग आ न सका, माहौल की निकली हवा' और 'लंबी छुट्टी से दूर नहीं हुई मुसीबत' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी... 

 

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ब्लैक लिस्टेड माफिया बेखौफ

राजस्व वाले एक महकमे के आला अफसरों ने माफियाओं पर शिकंजा भले कस दिया हो लेकिन उनकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा है। सरकारी खजाने में डंके की चोट पर सेंधमारी करने वाले ये माफिया अब भी खुलेआम महकमे में देखे जाते हैं। 

पिछले दिनों चोरी का वाहन छुड़ाने के लिए पूरे यूपी में बदनाम एक माफिया राजधानी स्थित महकमे में बिल्कुल उसी तरह टहलते दिखा, जैसे अधिकारी सुबह-सुबह लोहिया पार्क में सेहत बनाते हैं। ये माफिया धड़ल्ले से अपना काम कराने के लिए जुगाड़ तलाश रहा था। पता नहीं किसका आशीर्वाद है।

 

महाठग आ न सका, माहौल की निकली हवा

जमीन और निवेश के नाम पर एक महाठग हजारों करोड़ पार कर वर्षों lसे विदेश में ठिकाना बना रखा है। कुछ समय पहले दुबई के एक मामले में वह गिरफ्तार हुआ। जानकारी होते ही यहां की जांच एजेंसी में खुशी की लहर दौड़ गई। बड़े बड़े अफसरों ने माहौल बनाना शुरू किया कि महाठग जल्द भारत लाया जाएगा।

दरअसल माहौल से अधिकारी खुद का पीआर बनाने में जुट गए ताकि ऊपर तक उनकी वाहवाही हो जाए। हुआ भी कुछ ऐसा लेकिन अब महाठग खुलकर सोशल मीडिया अपनी 'शाइन' बिखेर रहा है। अब अधिकारी भी थोड़ा सन्नाटे में हैं। क्योंकि उसका प्रत्यर्पण तो हो न सका । इसकी साथ उनके माहौल की भी हवाल निकल गई।

 

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लंबी छुट्टी से दूर नहीं हुई मुसीबत

प्राधिकरण के उप अधिकारी को सर्वेसर्वा ने इतना कस दिया कि सुरक्षित सेवा का अफसर होते हुए भी बेचारा लंबी छुट्टी पर भाग गया। शासन में बैठे बॉस ने समझाया कि ऐसे मैदान नहीं छोड़ते तो उप अधिकारी काम पर लौटे। हालात अब भी वैसे ही बने हुए हैं। इसलिए मामला उच्चस्तर पर भी पहुंचाया जा रहा है।
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