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सुना है क्या: जिस पर जांच उसी को कमान... ब्यूरोक्रेसी का ये स्टाइल चर्चा में, करामाती टेबल की अजब कहानी

Thu, 08 Jan 2026 12:09 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

सुना है क्या में आज यूपी की ब्यूरोक्रेसी के बीच चल रहे किस्सों पर एक नजर। यहां पर अलग ही मुद्दों पर चर्चा हो रही है। जिस अधिकारी की जांच होनी है उसी को रिपोर्ट तैयार करके देना है। वहीं, एक करामाती टेबल की भी बड़ी चर्चा हो रही है। यहां पढ़ें कानाफूसी: 
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुना है क्या में आज यूपी की ब्यूरोक्रेसी के बीच चल रहे किस्सों पर एक नजर। यहां पर अलग ही मुद्दों पर चर्चा हो रही है। जिस अधिकारी की जांच होनी है उसी को रिपोर्ट तैयार करके देना है। वहीं, एक करामाती टेबल की भी बड़ी चर्चा हो रही है। यहां पढ़ें कानाफूसी: 

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जांच का तरीका नजीर न बन जाए

बढ़िया कमाई वाले महकमे में पश्चिम के रईस जिले में ऊंचे पद पर काबिज एक नौकरशाह अपने कारनामों की वजह से टॉक ऑफ द टाउन रहते हैं और इसी वजह से जांच का शिकार हो गए। महकमे से लेकर शासन तक में चर्चा है कि जांच का जिम्मा जिन सीनियर मैडम को दिया गया था, उन्होंने अफसर को ही जांच रिपोर्ट तैयार करने की कमान सौंप दी। अब रिपोर्ट कैसी तैयार होगी, इसकी खबर तो बनने से पहले ही सभी को लग गई। जोरों की खुसफुसाहट है कि कहीं जांच की स्टाइल का ये फैसला ब्यूरोक्रेसी में नजीर न बन जाए और हर आरोपी इसकी आड़ में खुद को बचा ले।

40 क्विंटल की करामाती टेबल
सेहत से जुड़े एक विभाग में अफसर की 40 क्विंटल की करामाती टेबल सुर्खियों में है। इस टेबल को बनवाने के लिए वन विभाग के कई अधिकारियों की राय ली गई थी। लाखों की लागत से टेबल तो तैयार हो गई लेकिन अंडर टेबल का खेल शुरू होने से पहले वास्तु शास्त्र का अड़ंगा लग गया। वास्तु शास्त्रियों ने कह दिया कि जहां टेबल रखी है वह जगह ठीक नहीं है। ऐसे में अधिकारी ने खुद के बैठने की जगह तो बदल ली, लेकिन टेबल दूसरी जगह नहीं जा पा रही है। अब इस करामाती टेबल को अगली मंजिल पर पहुंचाने के लिए विशेषज्ञों की राय ली जा रही है।
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आने से पहले ही बनाया अतिथि
प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में बड़े साहिबान से समीकरण साधने के अजीब हाल हैं। हाल ही में प्रदेश के एक प्रमुख विश्वविद्यालय में नए बड़े साहब की तैनाती हुई है। अभी तक ज्वॉइन नहीं किया, लेकिन अपने समीकरण बेहतर करने के लिए एक विभाग ने अपने यहां आयोजित कार्यक्रम में साहब को ही मुख्य अतिथि बना दिया। इसे लेकर जब विश्वविद्यालय व अन्य जगह चटखारे लिए जाने लगे तो आनन-फानन में संशोधन किया गया था। हालांकि यह परिसर में आम चर्चा हो गई है कि ऐसी भी क्या जल्दी थी?
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