माननीय ने लिया है कुर्सी का ठेका
एक पूर्व माननीय भगवा दल के संगठन में कुर्सी दिलाने का ठेका लेकर घूम रहे हैं। दरअसल माननीय 2024 में खुद चुनाव हार गए थे। राज्य स्तर पर पर्दे के पीछे से वह अपनी ही सरकार के लिए गड्ढे खोदते रहे हैं, ताकि दिल्ली में उनकी पकड़ मजबूत रहे। इसमें वह सफल भी हैं।
लिहाजा उनकी कोशिश है कि संगठन में उनके चेले घुसे रहें। चर्चा है कि उन्होंने एक भोंपू को मुख्य संगठन में तो एक चहेते को युवा संगठन के मुखिया की कुर्सी दिलाने का ठेका ले रखा है। इसके लिए वह दिल्ली में लामबंदी किए हुए हैं। अब देखना है कि बहुप्रतीक्षित सूची में माननीय का ठेका कितना सफल होता है?
दो धुरंधर पास, एक को इंतजार
अवध क्षेत्र में तीन धुरंधर लेकिन एकदूसरे के धुर विरोधी नेता हैं। तीनों धुरंधर मूल रूप से विपक्षी दलों से हैं। अलग-अलग समय पर सत्ताधारी दल का उन्होंने दामन थामा। इनमें से दो मंत्री बन गए लेकिन तीसरे के हाथ यह उपलब्धि नहीं आई। तीसरे को इसका अफसोस है। गाहे-बगाहे उनका दुख भी प्रकट हो रहा है। कोई इसे गुस्सा मान रहा है तो कोई पीड़ा। अब यह कितना रंग दिखाता है, यह भविष्य ही बताएगा।
अब मैदान में खुलकर आमने-सामने
सूबे के माफिया की सियासी लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है। तलवारें खिंच चुकी हैं और एक दूसरे को नीचा दिखाने की कसरत तेज होती जा रही है। आग में घी डालने का काम कुछ समर्थक ऐसे कर रहे हैं कि गैंगवार की नौबत आने को है।
दोनों ही अपने परिजनों को जिले की एक कुर्सी पर काबिज करना चाहते हैं। लगता है कि इस बार भी हालत लोकसभा चुनाव जैसी होगी जिसमें दो लोगों के झगड़े में तीसरा बाजी मार ले गया था। सुना है कि उस चुनाव में अपना जोर लगाने वाले पूर्व माननीय मोटी कीमत लेकर पीछे हटे थे।