आप पीआर वाले हैं, काम नहीं होगा
राजस्व वाले पांच महकमों में से एक में ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर एक गुट ने दुकान खोल ली है। पिछली सत्ता में हाशिये पर पड़े इस गुट ने हर पोस्टिंग के लिए अलग रेट रखे हैं और एडवांस बुकिंग शुरू कर दी है। अच्छी पोस्टिंग की लालसा में दो अधिकारी गुट के ‘सरदार’ के पास गए। जवाब मिला, तुम्हारा केस नहीं लेंगे क्योंकि तुम पीआर वाले हो। दोनों को समझ नहीं आया। बहुत सिर खुजाया तो पता चला कि यहां पीआर का मतलब पब्लिक रिलेशन नहीं बल्कि अपनी प्रतिस्पर्धी गुटों से है।
अब कोई उम्मीद नहीं बची
होमगार्ड विभाग के एक अफसर बहुत परेशान हैं। चंद मिनट बात करने से ही उनके भीतर की कसक उजागर हो जाती है। वजह है उनकी लंबे समय से विभाग में तैनाती। जैसे जैसे महीने और साल बीतते गए वैसे-वैसे ही उनकी आस भी टूटती गई। उनको उम्मीद नहीं बची है कि कहीं बेहतर पोस्टिंग हो पाएगी। अपनी पीड़ा बताने में सरकार को कोसते हैं, फिर कहते हैं कि उनका भला अब संभव नहीं है, क्योंकि सरकारी उनकी हितकारी नहीं है।
कट्टा नहीं पट्टा
मछली वाले मंत्री इन दिनों समाज को सुधारने में जुटे हैं। वे बात- बात में कहते हैं कि अब हमें कट्टा नहीं चाहिए। हमें सिर्फ पट्टा चाहिए। कट्टा चलाने के दिन लद गए हैं। वह समाज के लोगों को सचेत भी करते हैं कि अब जो कट्टा लेकर चलेगा, उसे जेल जाना पड़ेगा। इसलिए कट्टा लेकर न चलें। पट्टा लेकर घर जाएं। वह केंद्रीय मंत्रियों से भी समाज के लिए पट्टा मांगते हैं। उनकी इस बात को लेकर विभाग में चर्चा तेज हो गई है कि वह कितने लोगों को पट्टा दिलाने में कामयाब होते हैं और कितने लोगों के हाथ से कट्टा छुड़वाएंगे।