हाथरस कांड को लेकर हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं, लेकिन जांच किस दिशा में जाएगी और कौन ले जाएगा यह अभी तय नहीं हो पा रहा है। राज्य सरकार चार दिन पहले सिफारिश भेज चुकी है, लेकिन सीबीआई ने अभी तक इस मामले की जांच अपने हाथ में नहीं ली है। उधर, प्रवर्तन निदेशालय ने भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की है।
मौजूदा समय हाथरस कांड की जांच एसआईटी के अलावा हाथरस पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय भी जांच कर रहा है। हाथरस पुलिस जो जांच कर रही है उसकी निगरानी के लिए भी एक डीआईजी स्तर का अधिकारी लगा दिया गया है। वहीं एसआईटी की जांच आईजी स्तर के अधिकारी गृह विभाग के सचिव भगवान स्वरूप कर रहे हैं। एसआईटी को इस मामले में सिर्फ पुलिस की भूमिका की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। कथित गैंग रेप की जांच स्थानीय पुलिस ही कर रही है। इसके साथ ही हाथरस से जुड़ी डेढ़ दर्जन से अधिक एफआईआर की जांच अलग चल रही है। इसमें हाथरस के अलावा प्रदेश के अलग अलग जिलों में सोशल मीडिया पर माहौल खराब करने की जांच भी शामिल है।
मथुरा में पीएफआई से जुड़ा मामला दर्ज किया गया है जिसकी जांच पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय कर रहे हैं। जातीय दंगे के लिए फंडिंग मामले की जांच ईडी अलग कर रहा है। हालांकि इस मामले में अभी तक ईडी ने एफआईआर दर्ज नहीं की है। ईडी के अधिकारियों का कहना है कि अभी प्रारंभिक परीक्षण किया जा रहा है। इसके बाद रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी और वहां से अनुमति मिलने के बाद एफआईआर दर्ज की जाएगी।
पीएफआई के खातों पर ईडी की नजर
हाथरस मामले को जातीय हिंसा में बदलने की साजिश को अंजाम देने के लिए विदेश से सौ करोड़ से अधिक की फंडिंग की प्रमाणिकता में जुटे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पीएफआई के बैंक खातों पर नजर टिका दी है। निदेशालय धन एकत्र करने के लिए तैयार की गई वेबसाइट से जुड़े खातों का पता लगा रहा है। इसके लिए वेबसाइट के सर्विस प्रोवाइडर से जानकारी मांगी गई है, जिससे कि वेबसाइट से जुड़े बैंक खातों का पता चल सके।
हाथरस में जातीय हिंसा की साजिश में पीएफआई संगठन की भूमिका सामने आई है। यह भी चर्चा है कि मॉरीशस समेत अन्य देशों से जातीय दंगा भड़काने के लिए तकरीबन सौ करोड़ रुपये भेजे गए। हालांकि निदेशालय औपचारिक तौर पर इतनी रकम के आने की पुष्टि नहीं कर रहा हैै। पर मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश जारी है।