उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित हाथरस कांड मामले में शुक्त्रस्वार को सीबीआई ने तफ्तीश की स्टेटस रिपोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में पेश की। कोर्ट ने इसे देखने के बाद पुन: सीलबंद लिफाफे में रखवा दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को नियत किया है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने शुक्त्रस्वार को यह आदेश हाथरस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर गरिमा पूर्ण ढंग से अंतिम संस्कार के अधिकार शीर्षक से कायम जनहित याचिका पर दिया। मामले की सुनवाई के समय राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही और मामले में नियुक्त न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता जेएन माथुर पेश हुए।
सीबीआई के वकील अनुराग सिंह ने कोर्ट को मामले में हो रही कारवाई की जानकारी दी और तफ्तीश की स्टेटस रिपोर्ट सील कवर में पेश की। सीबीआई के अधिवक्ता ने कोर्ट के पूछने पर बताया कि केस में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। इस केस की पहले सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में ही होने का आदेश दिया था।
यह है मामला
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के चंदपा इलाके के बूलगढ़ी गांव में 14 सितंबर 2020 को चार लोगों ने कथित रूप से 19 साल की दलित युवती से सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस दौरान युवती को गंभीर चोट आई थी। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान 29 सितंबर को पीड़िता की मौत हो गई थी। पीड़िता की 30 सितंबर को रात के अंधेरे में उसके घर के पास ही अंत्येष्टि कर दी गई थी। उसके परिवार का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर किया, जबकि स्थानीय पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि परिवार की इच्छा के मुताबिक ही अंतिम संस्कार किया गया।