अयोध्या में विराजमान हनुमान जी
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रामनगरी में दीपोत्सव के साथ-साथ हनुमान जयंती का भी उल्लास छलक रहा है। शुक्रवार को कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी, स्वाती नक्षत्र, मेष लग्न पर हनुमान जयंती मनाई जाएगी। बजरंगबली की प्रधानतम पीठ हनुमानगढ़ी में विशेष अनुष्ठानों के साथ विविध आयोजन होंगे। हनुमान जयंती पर सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी में वर्ष में केवल एक बार ही हनुमान जी की तिजोरी खुलती है। तिजोरी से निकलने वाले आभूषणों से हनुमान जी का भव्य श्रृंगार किया जाता है।
सागरिया पट्टी के महंत ज्ञानदास के उत्तराधिकारी महंत सजय दास बताते हैं कि माना जाता है कि भगवान राम के लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने से एक दिन पूर्व ही हनुमान जी उनके आगमन की सूचना लेकर अयोध्या पहुंच गए थे। भगवान राम के अयोध्या आगमन की इतनी खुशी थी कि ऐसे लग रहा था कि मानो अयोध्या का नया जन्म हुआ है। हनुमान जयंती पर्व का महत्व इसलिए भी खास हो जाता है। हनुमान जयंती का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। हनुमानगढ़ी को रंग बिरंगी लाइटों, झालरों से रोशन किया जाता है। मंदिर में विगत 4 नवंबर से ही नवाह पारायण के साथ अनुष्ठानों का शुभारंभ हो गया है।
महंत सजय दास ने बताया कि इस दिन वर्ष में केवल बार ही हनुमान जी की तिजोरी खुलती है। तिजोरी से निकलने वाले आभूषणों को साफ किया जाता है फिर सोना, चांदी, हीरा, जवाहरात आदि आभूषणों की गिनती की जाती है। सारे आभूषणों को फिर नए धागे में गुहा जाता है। इन्हीं आभूषणों से हनुमान जी महाराज का भव्य श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद हनुमान जी महाराज को षाडेशोपचार पूजन, अभिषेक आदि भी किया जाता है।