लखनऊ। नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर फिर वैधानिक सवाल खड़े हो गए हैं। बीते 18 नवंबर को कार्यकारिणी से पास हुए पुनरीक्षित बजट को बिना सदन की मंजूरी के खर्च किया जा रहा है। करीब तीन महीने की देरी के बाद अब इस बजट को मंजूरी के लिए सदन में लाया जा रहा है, जिस पर विपक्ष के भारी विरोध की संभावना है।
नगर निगम के पुनरीक्षित बजट में करीब 55 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि सदन से अंतिम मुहर लगे बिना ही इस राशि का लगभग आधा हिस्सा खर्च भी कर दिया गया है। जानकारों का मानना है कि यदि सदन में किसी मद पर असहमति बनी या विवाद हुआ, तो पहले ही खर्च हो चुके बजट में सुधार करना लगभग असंभव होगा।
सपा पार्षद यावर हुसैन रेशू और कांग्रेस पार्षद ममता चौधरी ने इस प्रक्रिया पर कड़ा एतराज जताया है। पार्षदों का तर्क है कि सामान्य सदन की बैठक से पहले पुनरीक्षित बजट की विशेष बैठक बुलाई जानी चाहिए थी। बिना सदन की स्वीकृति के फंड जारी करना नगर निगम अधिनियम के प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।
महापौर की सफाई और सत्ता-विपक्ष में तकरार
27 जनवरी की बैठक में भी यह मुद्दा उठा था, जहां महापौर सुषमा खर्कवाल ने निगम प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उन्होंने बजट और सामान्य सदन की संयुक्त बैठक का सुझाव दिया था, मगर सामान्य सदन ही बुलाया गया। विरोध बढ़ने पर उन्होंने यह तक कह दिया था कि कहो तो पुनरीक्षित बजट रोक दिया जाए।
पार्षदों ने उठाए सवाल
भाजपा पार्षद नागेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि अधिनियम के अनुसार कार्यकारिणी के बाद सदन की मंजूरी अनिवार्य है। अगर बिना सदन के ही पैसा खर्च करना है, तो सदन का क्या मतलब। फिर तो इसे भंग कर देना चाहिए। यह अफसरों की मनमानी है। वहीं, सपा पार्षद यावर हुसैन रेशू ने कहा कि हम सदन में रिपोर्ट मांगेंगे कि किस मद में कितना पैसा खर्च हुआ। बिना मंजूरी खर्च करना वैधानिक रूप से गलत है। कांग्रेस पार्षद ममता चौधरी ने कहा कि कार्यकारिणी में केवल 12 पार्षद होते हैं, जबकि सदन में 110। ऐसे में यह जरूरी नहीं कि कार्यकारिणी की मंजूरी सही ही हो।
बजट में इन प्रमुख मदों पर बढ़ा खर्च
मद
पुराना बजट (पुनरीक्षित) बजट
न्यायालय व शासन के कार्य
5 करोड़ 12 करोड़
नगर निगम भूमि सर्वे
2 करोड़ 4 करोड़
ट्रैफिक सुधार कार्य
50 लाख
3 करोड़
सड़कों की मरम्मत
271 करोड़ 362 करोड़
भवन निर्माण
10 लाख
2.10 करोड़
पार्कों का रखरखाव
35 करोड़ 42 करोड़
नई सड़क का निर्माण
5 करोड़
7 करोड़
डीजल और पेट्रोल खर्च
20 करोड़ 32 करोड़
शौचालय मरम्मत
10 लाख
1.50 करोड़
स्ट्रीट लाइट (नई व मरम्मत)
5 करोड़ 7 करोड़
कल्याण मंडपों का रखरखाव
1 करोड़
1.50 करोड़
औद्योगिक क्षेत्र में विकास कार्य
4 करोड़
5 करोड़