केजीएमयू में आधे घुटने का प्रत्यारोपण
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में घुटने का आंशिक प्रत्यारोपण किया गया। इसमें पूरा घुटना नहीं बदला गया। इसके बजाय घुटने का सिर्फ एक हिस्सा ही प्रत्यारोपित किया गया। इसकी वजह से रोगी की मांसपेशियां सलामत रहीं और घुटना पहले की तरह असली होने का एहसास दिला रहा है।
हड्डी रोग विभाग के डाॅक्टर शैलेंद्र सिंह ने बताया कि 52 वर्षीय सुलतानपुर निवासी महिला को घुटने के एक हिस्से में प्रत्यारोपण की जरूरत थी। उनका पूरा घुटना खराब नहीं था इसलिए माइक्रोप्लास्टी तकनीक का चयन किया गया। आमताैर पर इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इस तकनीक में दो से तीन इंच का चीरा लगाकर इंप्लांट डाला जाता है। इसमें कम खून बहता है और जल्द रिकवरी हो जाती है। इस मामले में महिला की सर्जरी मंगलवार को की गई और उनको बुधवार को डिस्चार्ज कर दिया गया। इस तकनीक की सर्जरी में करीब 90 हजार रुपये खर्च आया। सर्जरी के बाद महिला सामान्य रूप से उठ, चल और बैठ सकेंगी। सर्जरी करने वाली टीम में डॉ. विनीता सिंह, डॉ. मनोज चौरसिया, डॉ. रविन्द्र मोहन, डॉ. दीपक कुमार और डॉ. अंकुर मान शामिल रहे।
वर्ष 2019 में हुई शुरुआत
हड्डी रोग विभाग के प्रो.आशीष कुमार ने बताया कि माइक्रोप्लास्टी तकनीक की शुरुआत विभाग में वर्ष 2019 में की गई थी। आमताैर पर इसके केस कम होते हैं। यह अच्छी तकनीक है। कम उम्र के रोगियों के साथ हीखिलाड़ियों के लिए भी यह तकनीक बेहद उपयोगी है।