लखनऊ। उद्योग जगत का अनुभव रखने वालों के पास लखनऊ विश्वविद्यालय में शिक्षक बनने का अवसर है। इसके लिए कम से कम 15 वर्ष का व्यावसायिक अनुभव होना जरूरी है। उच्च शिक्षा को उद्योग और समाज की जरूरतों के साथ जोड़ने के लिए लविवि ने पहली बार प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस और एडजंक्ट फैकल्टी के चयन का नियम बनाया है। विद्या परिषद ने भी इसे पारित कर दिया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और यूजीसी के निर्देश पर यह पहल की गई है। प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस पद का उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी, वाणिज्य, मीडिया, सिविल सेवा, सशस्त्र बल, कानून और ललित कला जैसे क्षेत्रों के प्रतिष्ठित पेशेवरों को शैक्षणिक परिवेश में लाना है। चयनितों को अधिकतम करीब 30 हजार रुपये महीना वेतन मिलेगा। कक्षाओं की संख्या के अनुसार अतिरिक्त वेतन भी दिया जाएगा।
पाठ्यक्रम तैयार करने की भी होगी अनुमति
ये शिक्षक प्रो-विशेषज्ञ के रूप में पाठ्यक्रम तैयार करने, शिक्षण, मार्गदर्शन, नवाचार और उद्योग जगत के साथ सहयोग को मजबूत करने में योगदान देंगे। इन नियुक्तियों के लिए जरूरत के अनुसार औपचारिक शैक्षणिक योग्यता और शोध प्रकाशन की छूट दी गई है।
विद्यार्थियों को यह होगा फायदा
इन नियुक्तियों से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस उद्यमिता को बढ़ावा देने, छात्र परियोजनाओं का मार्गदर्शन करने और उद्योग के साथ अनुसंधान सहयोग व परामर्श गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
एक निश्चित अवधि के लिए होगी नियुक्ति
समन्वयक प्रो. गीतांजलि मिश्रा ने बताया कि शुरुआत में एक वर्ष के लिए नियुक्ति होगी। प्रदर्शन मूल्यांकन के आधार पर इसे अधिकतम चार वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। छात्रों के फीडबैक से योगदान का मूल्यांकन किया जाएगा।
कोट........
शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रासंगिक, गतिशील और वास्तविक दुनिया की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में यह अहम कदम है। हमारा लक्ष्य उद्योग जगत के नेताओं और अनुभवी पेशेवरों को शैक्षणिक क्षेत्र में लाकर छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान, उद्यमशीलता कौशल और वैश्विक दृष्टिकोण देना है।
— प्रो. जेपी सैनी, कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय