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मंत्री के गनर ने दिया लोहिया संस्थान को 52 लाख का झटका, सस्पेंड

Sun, 04 Jun 2017 01:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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एमआरआई मशीन में लगी रिवॉल्वर - फोटो : amar ujala
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डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की एमआरआई मशीन से दोबारा जांच शुरू होने 10 से 12 दिन का समय लगेगा। कंपनी के इंजीनियरों ने अनुमान लगाया है।
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शुक्रवार शाम से मशीन की जांच में जुटे इंजीनियरों ने मशीन को दोबारा शुरू करने में लगभग 52 लाख रुपये का खर्च बताया है। इसमें हीलियम गैस को निकालने और दोबारा भरने की प्रक्रिया शामिल है। हालांकि गैस निकालना काफी कठिन है, इसलिए लोहिया इंस्टीट्यूट के रेडियोडायग्नोसिस विभाग के आस-पास के क्षेत्र से लोगों को हटा दिया जाएगा। सिर्फ विप्रो जीई कंपनी के इंजीनियर्स व अन्य स्टाफ ही वहां रहेगा। वहीं, लापरवाही पर मंत्री के गनर मुकेश शर्मा को निलंबित कर दिया गया है।

गौरतलब है कि खादी व ग्रामोद्योग मंत्री सत्यदेव सिंह पचौरी शुक्रवार को जांच कराने लोहिया संस्थान पहुंचे थे। एमआरआई जांच के लिए गए मंत्री का गनर मुकेश शर्मा जबरदस्ती कंसोल रूम में घुसा था। उसके घुसते ही कमर में लगी खिंचकर मशीन में जा फंसी। इस दबंगई का खामियाजा लोहिया संस्थान और मरीजों को भुगतना पड़ेगा।
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लोहिया संस्थान को जहां मशीन के बनाने के लिए 52 लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे, वहीं मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल जांच के लिए भटकना पड़ेगा। हालांकि संस्थान प्रशासन ने एमआरआई शुरू करने के लिए शुक्रवार को ही इंजीनियरों को बुला लिया था। अब मरीजों को 15 दिन बाद की डेट दी जा रही है।

अमेरिका से आएगी 2500 लीटर लिक्विड हीलियम गैस

एमआरआई रूम के बाहर लगे नोट‌िस
एमआरआई कंपनी विप्रो जीई के इंजीनियरों ने बताया कि लोहिया इंस्टीट्यूट की एमआरआई तीन टेस्ला की है। इस मशीन में लगभग ढाई हजार लीटर लिक्विड हीलियम गैस भरी रहती है। इसी से एमआरआई की गैंट्री में चुंबकीय क्षेत्र बनता है।

पिस्टल को छुड़ाने के लिए गैस को बाहर निकालना होगा। इससे मशीन से चुंबकीय शक्ति खत्म हो जाएगी। जब पिस्टल छूट जाएगी तो फिर से हीलियम गैस को भरा जाएगा।

इस पूरी प्रक्रिया में 10 से 12 दिन लग सकते हैं। क्योंकि लिक्विड हीलियम गैस का कंटेनर न्यूयार्क से मंगाया जाएगा। ये कंटेनर वाया मुंबई लखनऊ  मंगाया जाएगा। इस प्रक्रिया में जो समय लगेगा वही महत्वपूर्ण है। बाकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

संस्थान ने बनाई छह सदस्यीय जांच कमेटी

मशीन खराब होने की सूचना
एमआरआई में मंत्री के गनर की पिस्टल फंसने के मामले में लोहिया इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो.दीपक मालवीय ने जांच के लिए छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।

इसमें कार्डियोलॉजी विभाग के हेड व डीन प्रो. मुकुल मिश्रा की अध्यक्षता में वित्त नियंत्रक नरसिंह नारायण यादव, रेडियोडायग्नोसिस विभाग की प्रो. रागिनी सिंह, न्यूरोलॉजी विभाग के हेड प्रो. एकेठक्कर, संयुक्त निदेशक हौसिला प्रसाद वर्मा को सदस्य और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुब्रत चंदा को सदस्य सचिव बनाया गया है।

मशीन खराब, वापस लौटे मरीज

मशीन खराब होने पर परेशान होते मरीज
लोहिया संस्थान की एमआरआई से रोजाना 22 से 25 मरीजों की जांच की जाती है। शनिवार को हाफ डे होने केकारण पहले से ही लगभग 15 मरीजों को जांच के लिए बुलाया गया था।

इनमें से जिनके मोबाइल फोन नंबर अस्पताल प्रशासन के पास थे उन्हें तो मशीन खराब होने के कारण जांच के लिए न आने की सूचना दे दी गई लेकिन कई मरीज इसके बावजूद वहां पहुंच गए।

बाराबंकी से अपनी मां के साथ आयी मोहिसना (32) को कमर की जांच करानी थी लेकिन जब वह लोहिया संस्थान पहुंची तो उसे वापस जाने के लिए कहा गया। साथ ही उसे जांच के लिए 22 जून को आने की डेट दी गई है। वहीं बलिया से आए चंद्रभूषण सिंह (50) को निजी डायग्नोस्टिक सेंटर जाना पड़ा।

जो जांच लोहिया अस्पताल में 3500 में होती, उसके लिए उन्हें 4500 रुपए खर्च करने पड़े। चंद्रभूषण सिंह के परिवारीजनों ने बताया कि सर्वाइकल स्पाइन की जांच का शुल्क वैसे तो 5700 रुपए था लेकिन संस्थान के चिकित्सकों ने उन्हें 1200 रुपए की छूट दिला दी। देर शाम को जांच रिपोर्ट आने के बाद उन्हें भर्ती कर लिया गया।
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शैडो ने किया पिस्टल निकालने का प्रयास

- फोटो : amar ujala
मंत्री के शैडो मुकेश कुमार शर्मा ने घटना के बाद अपनी पिस्टल को एमआरआई गैंट्री से निकालने का प्रयास किया था, लेकिन वह उसे हिला भी नहीं पाया। जब उसे बताया गया कि बिना मशीन बंद करे पिस्टल नहीं निकलेगी तो वह हटा।

पुलिस को दी गई सूचना
निदेशक प्रो. दीपक मालवीय ने बताया कि एमआरआई में पिस्टल फंसी होने की लिखित सूचना विभूति खंड थाने को दी गई है। सरकारी शैडो की पिस्टल होने के कारण ये फैसला लिया गया। क्योंकि पिस्टल निकालने के दौरान पुलिस का रहना जरूरी है।
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