गुमनामी बाबा उर्फ भगवन जी के सामानों की प्रदर्शनी रामकथा संग्रहालय में आम लोगों के लिए नवंबर में खोली जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में प्रदर्शनी के लिए गैलरियों का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भतीजी ललिता बोस व नेताजी विचार मंच के संयोजक शक्ति सिंह की संयुक्त याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ की ओर से 31 जनवरी 2013 के दिए निर्णय में गुमनामी बाबा के सामानों को संग्रहालय में संरक्षित करने का आदेश दिया गया था।
गुमनामी बाबा के सामानों की प्रदर्शनी के लिए रामकथा संग्रहालय में दो आर्ट गैलरियों का निर्माण पूरा हो चुका है। डिस्पले के लिए सामानों की नेम प्लेट भी तैयार कराई जा चुकी है, केवल फिनिशिंग बाकी है, जो अक्टूबर तक पूरा होने की उम्मीद है। रामकथा संग्रहालय के वीथिका सहायक मानस तिवारी बताते हैं कि आर्ट गैलरी के डिस्पले बोर्ड में सामान लगने के बाद नेम प्लेट लगा दी जाएगी। निर्माण कार्य अब पूर्णता की ओर है।
उम्मीद है कि नवंबर में गुमनामी बाबा के सामानों की प्रदर्शनी आम जनता के लिए खुल सकती है। गुमनामी बाबा के दस्तावेजों के डिजिटलाइजेशन का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। प्रथम चरण में गुमनामी बाबा की पुस्तकों का डिजिटलाइजेशन पूरा किया जा चुका है। डिजिटलाइजेशन की कार्रवाई नेशनल इंफॉरमेटिक सेंटर के माध्यम से कराई जा रही है। इसके बाद संबंधित पुस्तकों में बाबा की ओर से की गई टिप्पणियों को लेकर हैंडराइटिंग पर भी शोध करने की योजना है।