थाने में पहले किशोरी की मां ने तहरीर दी थी। बाद में पुलिस ने किशोरी के पिता के नाम से तहरीर ली। इसके बाद पहले दी गई तहरीर बदलवा दी गई। इसमें आरोपियों द्वारा देह व्यापार कराने का आरोप ही हटा दिया गया। इसकी वजह से एफआईआर में भी देह व्यापार की धारा नहीं लगाई गई। उधर, किशोरी की आपबीती सुनने और आरोपियों की धमकी से पूरा परिवार डरा हुआ है। कुछ लोगों ने पीड़िता के परिवार को समाज सेविका सुमन रावत का नंबर दिया। 11 मई की रात सुमन उन्हें वन स्टॉप सेंटर लेकर पहुंचीं और प्रभारी अर्चना सिंह को पूरी बात बताई। 12 मई को वन स्टॉप सेंटर की टीम पीड़ित परिवार को लेकर गुडंबा थाने पहुंची, जिसके बाद केस दर्ज हुआ।
पीड़िता के पिता के मुताबिक असलम के कमरे पर देर रात तक अराजक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता था। वह अक्सर उनके घर भी ऐसे लोगों को लेकर आने लगा। इस पर 11 मई को उन्होंने खत्री चौकी पर शिकायत की। शिकायत पर दो सिपाही घर पहुंचे, जहां नैंसी ने सिपाही को धमकाते हुए वर्दी उतरवाने की धमकी दी। इसके बाद 112 पर सूचना दी गई। विवाद बढ़ने पर पीड़िता ने नैंसी और असलम के हैवानियत की कहानी सुनाई। इससे बौखलाकर नैंसी ने पुलिस कर्मियों के सामने ही पीड़िता व उसके परिवार को नंगा करके पीटने की धमकी दी। छानबीन में सामने आया कि आरोपी पीड़िता का मकान कब्जा करना चाहते थे। इसके लिए वह दबाव बना रहे थे।