फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: एचएसएन कोड अपडेट न होने पर नहीं मिल रहा जीएसटी का लाभ

विज्ञापन
दिनेश गोस्वामी।
विज्ञापन
लखनऊ। स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार ने दवाओं और मेडिकल डिवाइस पर जीएसटी घटाकर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। कैंसर, जेनेटिक और दुर्लभ बीमारियों की 33 दवाओं से तो जीएसटी पूरी तरह हटा दिया गया है। ज्यादातर दवाओं और मेडिकल डिवाइस पर कर 12 से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, लेकिन पोर्टल पर एचएसएन कोड (नामकरण की सामंजस्यपूर्ण प्रणाली) अपडेट न होने से उद्यमी नई दरों का लाभ ग्राहकों तक नहीं पहुंचा पा रहे। नतीजा यह है कि आउटपुट टैक्स घटने और इनपुट टैक्स ज्यादा चुकाने से उनकी पूंजी लगातार फंस रही है।
विज्ञापन


पोर्टल पर अपडेट न होने से उलझन
प्लास्टिक उत्पादों के निर्माता दिनेश गोस्वामी बताते हैं कि मेडिकल कंपोनेंट पर टैक्स 18 से घटकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, मगर पोर्टल पर अलग एचएसएन कोड न होने से अब भी 18 प्रतिशत पर ही बिलिंग करनी पड़ रही है। ग्राहक को क्रेडिट नोट देना पड़ रहा है, जिसे बाद में एडजस्ट करना होगा। सरकार को बिना तैयारी के नई व्यवस्था लागू नहीं करनी चाहिए थी।
आयातित दवाओं को राहत, छोटे उद्यमी फंसे

फार्मा सेक्टर से जुड़े उद्यमी रितेश श्रीवास्तव कहते हैं कि फार्मास्यूटिकल्स कच्चे माल पर 18 प्रतिशत जीएसटी देना पड़ रहा है, जबकि तैयार उत्पाद सिर्फ 5 प्रतिशत पर बिक रहा है। एक लाख का माल बेचने पर 4 हजार रुपये सरकार के पास टैक्स के रूप में फंस जाता है। आयातित दवाओं पर तुरंत आईटीसी रिफंड मिल रहा है, इसलिए वे कम दाम पर उत्पाद बेच सकते हैं। लेकिन हमारे जैसे छोटे उद्यमी मुश्किल में हैं।
विज्ञापन

एक ही ट्रेड पर एक जैसी दर की मांग
राज्य औषधि निर्माता संघ के सचिव शैलेंद्र रघु का कहना है कि कच्चे माल और पैकिंग उत्पाद पर 18 प्रतिशत जीएसटी, जबकि तैयार माल पर 5 प्रतिशत जीएसटी लेने से असंतुलन पैदा हो गया है। पहले तैयार माल पर 12 प्रतिशत टैक्स था, अब 5 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे सरकार के पास ज्यादा पैसा जा रहा है और हमारी पूंजी ब्लॉक हो रही है। सरकार को नई रणनीति बनाकर समाधान करना चाहिए, नहीं तो छोटे उद्योग बुरी तरह प्रभावित होंगे।

दिनेश गोस्वामी।

दिनेश गोस्वामी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें